विश्वस्तरीय पैराशूट निर्माण में जीआईएल का परचम, आत्मनिर्भर भारत को दे रहा मजबूती

कानपुर से वैश्विक क्षितिज तक पहुंची पहचान, सेना की सामरिक जरूरतों के साथ निर्यात बाजार में भी बना रहा नए कीर्तिमान

कानपुर। देश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले कानपुर को विश्व मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाले रक्षा उत्पादन उपक्रमों में ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल) का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पैराशूट निर्माण के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट तकनीक, गुणवत्ता और विश्वसनीयता के बल पर जीआईएल न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।
फूलबाग स्थित पैराशूट सदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एम.सी. बालासुब्रमणियम ने संगठन की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और आत्मनिर्भर भारत अभियान में उसके योगदान की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप जीआईएल लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है तथा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में आयुध निर्माणी बोर्ड के अधीन संचालित आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) अब ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के अधीन कार्यरत है और अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। जीआईएल भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाला रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) है, जो भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना तथा अन्य रक्षा संगठनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण करता है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि संगठन में विभिन्न प्रकार के मैन ड्रॉप पैराशूट, सप्लाई ड्रॉप पैराशूट, लड़ाकू विमानों के लिए ब्रेक पैराशूट, पायलट पैराशूट, हैवी ड्रॉप सिस्टम, इल्युमिनेटिंग पैराशूट सहित अनेक अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है। इन उत्पादों की आपूर्ति वैश्विक मानकों के अनुरूप की जाती है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी जीआईएल की मांग लगातार बढ़ रही है।
एम.सी. बालासुब्रमणियम ने संगठन के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कानपुर के केईएम हॉल में आयुध पैराशूट निर्माणी की स्थापना की गई थी। प्रारंभ में पैराशूटों की मरम्मत से शुरू हुआ यह सफर आज विश्वस्तरीय पैराशूट निर्माण तक पहुंच चुका है। वर्षों की तकनीकी विशेषज्ञता, समर्पित कार्यबल और दक्ष अधिकारियों की टीम ने संगठन को पैराशूट निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उन्होंने बताया कि पैराशूट निर्माण के अलावा जीआईएल विभिन्न प्रकार के इनफ्लेटेबल रबरयुक्त उत्पाद, केएम फ्लोट तथा सैन्य एवं नागरिक उपयोग की नौकाओं का भी निर्माण कर रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता और उपयोगिता के कारण देश-विदेश से लगातार मांग प्राप्त हो रही है।
जीआईएल वर्तमान में रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ नागरिक और निर्यात बाजार में भी तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। संगठन की उपलब्धियां न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय हैं। आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में जीआईएल की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। प्रेस वार्ता के दौरान निदेशक वित्त एस. पटनायक, सीजीएम चंद्रशेखर, विवेक दुबे सहित रक्षा उत्पादन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में जीआईएल रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक उपलब्धियां हासिल कर देश का मान बढ़ाएगा।

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