पुरुषोत्तम मास की समाप्ति के साथ विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को मिली हरी झंडी, जुलाई में कई शुभ तिथियां उपलब्ध
कानपुर। लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की समाप्ति के बाद एक बार फिर मांगलिक कार्यों का दौर शुरू हो गया है। 15 जून को सोमवती अमावस्या के साथ पुरुषोत्तम मास का समापन हुआ था और ज्येष्ठ मास के आरंभ के साथ अब 19 जून से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण सहित अन्य शुभ कार्य किए जा सकेंगे। इसके साथ ही विवाह योग्य युवक-युवतियों और उनके परिवारों में उत्साह का माहौल है।ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश तिवारी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और यह लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। इस पूरे माह में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है, जबकि श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य, कथा, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास की समाप्ति के साथ ही अब शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय प्रारंभ हो गया है। विवाह के लिए जुलाई माह में 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 जुलाई को प्रमुख शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इन तिथियों पर बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है।पंडित तिवारी ने बताया कि जुलाई की 25 तारीख से चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा। सनातन परंपरा में चातुर्मास को भगवान विष्णु के योगनिद्रा काल के रूप में माना जाता है। इस अवधि में विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर पुनः विराम लग जाता है। चातुर्मास के चार महीने पूरे होने के बाद 20 नवंबर से एक बार फिर विवाह और अन्य शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू होगा।धार्मिक जानकारों के अनुसार मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के साथ ही मैरिज हॉल, बैंक्वेट, कैटरिंग, बैंड-बाजा, टेंट और सजावट व्यवसाय से जुड़े लोगों की व्यस्तता भी बढ़ने लगेगी। लंबे अंतराल के बाद शुभ मुहूर्त शुरू होने से विवाह उद्योग से जुड़े कारोबारियों को भी अच्छे व्यापार की उम्मीद है।