मांगें पूरी न होने पर 1 जुलाई से विधानसभा घेराव की चेतावनी, मानदेय वृद्धि और स्थायीकरण को लेकर तेज हुआ आंदोलन
कानपुर। ग्राम रोजगार सेवक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर अपनी लंबित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर रोजगार सेवकों ने आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। मानदेय वृद्धि, स्थायीकरण और सेवा सुरक्षा जैसी प्रमुख मांगों को लेकर कानपुर में व्यापक जनजागरण अभियान शुरू किया गया है। एसोसिएशन की प्रांतीय उपाध्यक्ष दीपा सोनकर के नेतृत्व में विकास खंड पतारा से अभियान की शुरुआत की गई, जिसके बाद विकास खंड कल्यानपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में रोजगार सेवकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर 30 जून तक सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 1 जुलाई से प्रदेशभर के रोजगार सेवक लखनऊ में विधानसभा के सामने विशाल धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे। जागरूकता अभियान के दौरान प्रांतीय उपाध्यक्ष दीपा सोनकर ने कहा कि रोजगार सेवक वर्षों से ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार सेवकों का मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। इसलिए मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जानी चाहिए और सभी रोजगार सेवकों को नियमित करते हुए स्थायी सेवा का लाभ दिया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में रोजगार सेवकों को पंचायत सचिव के समान अधिकार और जिम्मेदारियां प्रदान की जाएं। इसके अलावा सेवाकाल के दौरान किसी रोजगार सेवक की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को अनुकंपा के आधार पर तत्काल नौकरी दी जाए, ताकि परिवार आर्थिक संकट से बच सके। आंदोलन को मजबूती देने के लिए उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी रोजगार सेवकों के समर्थन का ऐलान किया है। महासंघ के कानपुर नगर संरक्षक बी.एल. गुलाबिया और जिला संगठन मंत्री बिन्दा प्रसाद ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि रोजगार सेवक ग्रामीण विकास व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं। सरकार को इनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि रोजगार सेवकों की लड़ाई केवल उनके अधिकारों की नहीं बल्कि ग्रामीण विकास व्यवस्था को मजबूत बनाने की भी लड़ाई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ इस आंदोलन में हर स्तर पर रोजगार सेवकों के साथ खड़ा रहेगा और उनकी मांगों के समर्थन में पूरा सहयोग देगा। कल्यानपुर विकास खंड में आयोजित बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश स्तर पर लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि अब आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। सरकार को 30 जून तक का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 1 जुलाई को प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों रोजगार सेवक लखनऊ पहुंचकर विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। बैठक में आंदोलन की रूपरेखा, जनसंपर्क अभियान और लखनऊ कूच की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में दीपा सोनकर, साजिद अली, चन्द्रशेखर चंदेली, सुरेन्द्र दीक्षित, आरती चौरसिया, सुषमा, नीलम सहित बड़ी संख्या में रोजगार सेवक एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।