कानपुर। बैंकिंग उद्योग के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA) का 30वां राष्ट्रीय सम्मेलन इस बार जबरदस्त विवाद और हंगामे के कारण चर्चा में आ गया है। गत 19 से 22 अप्रैल तक बेंगलूरु में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान महामंत्री पद को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए थे। अपने-अपने नेता के समर्थन में हुई नारेबाजी, शोर-शराबे और हंगामे के चलते सम्मेलन को बीच में ही स्थगित करना पड़ा था। अब संगठन ने आगामी 10 जून को बेंगलूरु में दोबारा राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है, जहां महामंत्री पद का चुनाव तीन सदस्यीय निगरानी टीम की देखरेख में कराया जाएगा।
बताया जा रहा है कि संगठन के लगभग 80 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब महामंत्री पद को लेकर इतना खुला संघर्ष देखने को मिल रहा है। वर्तमान महामंत्री सीएच वेंकटाचलम के खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन के नेता पीआर मेहता ने ताल ठोक दी है। इसके बाद से दोनों गुटों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी और प्रचार युद्ध तेज हो गया है। फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुपों पर पोस्टर, पर्चे और चुनावी संदेशों की बाढ़ सी आ गई है। समर्थक अपने-अपने उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। वेंकटाचलम गुट के समर्थक “वेंकटाचलम मजबूरी नहीं, जरूरी हैं” जैसे नारे लगा रहे हैं, वहीं विरोधी खेमे पर निशाना साधते हुए “पीआर मेहता मॉडल पर बुल्डोजर चलाओ” जैसे संदेश भी वायरल किए जा रहे हैं। दूसरी ओर पीआर मेहता समर्थक “पीएनबी का शेर, अब राष्ट्रीय संगठन का शेर बनेगा” नारे के साथ प्रचार अभियान चला रहे हैं।
इस चुनावी मुकाबले को लेकर देशभर के बैंक कर्मचारियों में जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन के प्रांतीय संयुक्त मंत्री रजनीश गुप्ता और सहायक महामंत्री अंकुर द्विवेदी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वर्तमान महामंत्री सीएच वेंकटाचलम का फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग उद्योग इस समय निजीकरण, मर्जर, स्टाफ की भारी कमी और अधिकारियों पर बढ़ते हमलों जैसे गंभीर संकटों से गुजर रहा है, ऐसे दौर में अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है।
वहीं पंजाब नेशनल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल सोनकर ने दावा किया कि वर्तमान महामंत्री को देश के 11 बैंकों के प्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वेंकटाचलम ने हमेशा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के अधिकारों, वेतन समझौतों, सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाई है। अब पूरे देश के बैंकिंग कर्मचारियों की निगाहें 10 जून को बेंगलूरु में होने वाले इस हाई-प्रोफाइल चुनाव पर टिकी हुई हैं, जहां यह तय होगा कि संगठन की कमान आगे किसके हाथों में जाएगी।
AIBEA चुनाव को लेकर घमासान तेज