मनीष गुप्ता
कानपुर,
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और दावों की पोल खोलती एक बेहद चिंताजनक तस्वीर कानपुर सेंट्रल स्टेशन के पास से सामने आ रही है। स्टेशन के आउटर पर स्थित मुरे कंपनी पुल के नीचे इन दिनों अवैध वेंडरों का राज है। यहाँ रोज दर्जनों युवक अपनी जान हथेली पर रखकर चलती ट्रेनों में चढ़ते हैं और यात्रियों को धड़ल्ले से पानी की बोतलें बेच रहे हैं। इस जानलेवा खेल से न सिर्फ इन युवकों की जिंदगी खतरे में है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
प्लेटफॉर्म आने से पहले ही होती है ‘घुसपैठ’
स्थानीय लोगों और यात्रियों के मुताबिक, यह सिलसिला सुबह से लेकर देर रात तक बदस्तूर जारी रहता है। जैसे ही कोई ट्रेन कानपुर सेंट्रल पर एंट्री करने से पहले मरी कंपनी पुल के पास धीमी होती है, वैसे ही पानी के कार्टन लिए युवक दौड़ते हुए चलती ट्रेन के पायदानों पर लटक जाते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से पहले ही ये युवक बोगियों के अंदर पानी बेचकर उतर भी जाते हैं। मिलीभगत की बू: आखिर क्यों मौन है आरपीएफ और जीआरपी रेलवे नियमों (Railway Act) के मुताबिक, बिना वैध लाइसेंस के रेल परिसर या ट्रेन के भीतर सामान बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद, आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की नाक के नीचे यह पूरा खेल महीनों से चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस अवैध वेंडिंग के पीछे किसी न किसी स्तर पर मिलीभगत जरूर है, जिसके कारण जिम्मेदार विभाग आँखें मूंदे बैठा है। चलती ट्रेन में बाहरी लोगों की इस तरह बेधड़क एंट्री से कोई भी बड़ी आपराधिक घटना हो सकती है। वहीं, चलती ट्रेन से पैर फिसलने पर आए दिन होने वाले हादसों के बावजूद प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। यात्रियों की सेहत से भी खिलवाड़
ट्रेनों में बिकने वाला यह पानी किस ब्रांड का है और कहाँ से भरा जा रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। बिना किसी मानक के बेचे जा रहे इस पानी से यात्रियों के स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इस संबंध में जागरूक नागरिकों ने रेलवे प्रशासन और डीआरएम (DRM) से मांग की है कि मरी कंपनी पुल के पास तत्काल प्रभाव से गश्त बढ़ाई जाए और इन अवैध वेंडरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समय रहते किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।