कानपुर-इस बार फलों का राजा आम आम आदमी की पहुंच से दूर रह सकता है। वजह है बीते दिनों लगातार बदला मौसम, बेमौसम बारिश और तेज आंधी, जिसने आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि मौसम की मार के चलते इस बार आम का उत्पादन काफी कम हुआ है, जिसका सीधा असर बाजार में कीमतों पर देखने को मिलेगा।
जानकारों के अनुसार इस बार गर्मी देर से शुरू हुई, जिससे आम की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। वहीं बार-बार हुई बारिश और तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में कच्चे आम पेड़ों से गिर गए। किसानों का अनुमान है कि करीब 40 से 50 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है।
इतना ही नहीं, जो फसल मौसम की मार से बच गई, उसे बंदरों के झुंड ने नुकसान पहुंचाया। ग्रामीण क्षेत्रों और बागों में बंदरों का आतंक इस बार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना रहा। बंदर पेड़ों पर चढ़कर आम तोड़ते और गिराते रहे, जिससे बची हुई पैदावार भी प्रभावित हुई।
किसान कालिका और राम अवतार कश्यप ने बताया कि आम की खेती में पूरे साल मेहनत करनी पड़ती है। सामान्य परिस्थितियों में एक एकड़ जमीन में आम की पैदावार से सभी खर्च निकालने के बाद एक से दो लाख रुपये तक की बचत हो जाती है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। उनका कहना है कि उत्पादन कम होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और आम उपभोक्ताओं के लिए भी महंगा साबित होगा।
हर साल मई के आखिरी सप्ताह तक बाजार दशहरी आमों से भर जाते थे, लेकिन इस बार बाजारों में आम की आवक काफी कम है। जो दूसरी प्रजातियों के आम बाजार में पहुंच भी रहे हैं, वे 50 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
आम की कम पैदावार का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। इस बार लोगों को फलों के राजा का स्वाद चखने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।
मौसम की मार से आधी हुई आम की फसल, बढ़ेंगे दाम