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कानपुर में सफाई व्यवस्था गुरुवार को पूरी तरह चरमरा गई जब नगर निगम के हजारों सफाई कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। शहर की सफाई व्यवस्था निजी हाथों में दिए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया, जिसके चलते पूरे शहर में कूड़े के ढेर लग गए और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सफाई कर्मियों और नगर निगम अधिकारियों के बीच हुई वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार सुबह से जोन कार्यालयों पर ताले जड़ दिए।
हड़ताल का असर सुबह से ही शहरभर में दिखाई देने लगा। आम दिनों में जिन सड़कों और मोहल्लों से नियमित रूप से कूड़ा उठाया जाता था, वहां कूड़े के ढेर लगे नजर आए। जानकारी के अनुसार शहर में प्रतिदिन लगभग 1350 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, लेकिन हड़ताल के चलते यह कूड़ा सड़कों और मोहल्लों में ही पड़ा रह गया। कूड़ा उठाने वाले करीब 65 वाहन जोन कार्यालयों में खड़े रहे और पूरे दिन कोई संचालन नहीं हो सका। सामान्य तौर पर इन्हीं वाहनों के जरिए प्रतिदिन लगभग 1200 मीट्रिक टन कूड़ा उठाया जाता है।
सुबह से ही नगर निगम मुख्यालय में सफाई कर्मचारी बड़ी संख्या में जुटने लगे। देखते ही देखते करीब एक हजार कर्मचारी परिसर में प्रदर्शन करने लगे, जबकि शहरभर के लगभग छह हजार सफाई कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार कर दिया। न तो सड़कें साफ हुईं और न ही कूड़ा उठाने का कार्य हो सका। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक निजी कंपनी को दिया गया टेंडर निरस्त नहीं किया जाएगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री अजीत बाघमार ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन सफाई कर्मचारियों को निजी कंपनियों के हाथों सौंपने का काम कर रहा है। उनका आरोप है कि साउथ की एक निजी कंपनी को कूड़ा उठाने और निस्तारण का टेंडर दिया गया है, जिसके बाद सफाई कर्मियों की नौकरी और वेतन व्यवस्था पर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई बार नगर आयुक्त से मिलने का समय मांगा गया, लेकिन कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के लिए अब तक समय नहीं दिया गया।
सफाई कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टेंडर निरस्त नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी बचाने की नहीं, बल्कि पूरे सफाई तंत्र को निजी हाथों में जाने से रोकने की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन कर्मचारियों की अनदेखी कर रहा है और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा।
हड़ताल के चलते शहर के कई इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। मोहल्लों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर कूड़े के ढेर जमा होने से बदबू फैलने लगी है। गर्मी के मौसम में कूड़ा जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोग नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद के जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से हड़ताल खत्म कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन कर्मचारियों के तेवर देखते हुए जल्द समाधान होता नहीं दिख रहा। शहरवासियों की नजर अब नगर निगम अधिकारियों और सफाई कर्मचारी संघ के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हुई है।