कानपुर/भुवनेश्वर। कानपुर समेत उत्तर प्रदेश की श्रमिक बस्तियों और लेबर कॉलोनियों में दशकों से रह रहे हजारों परिवारों को उनके मकानों का मालिकाना हक दिलाने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित राज्य परामर्शदात्री समिति के मुख्य सदस्य एवं गोविंद नगर विधायक सुरेंद्र मैथानी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उड़ीसा का दो दिवसीय दौरा कर वहां लागू “मालिकाना हक मॉडल” का गहन अध्ययन किया।
भुवनेश्वर में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश और उड़ीसा सरकार के अधिकारियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक मैराथन चर्चा हुई। बैठक में उड़ीसा सरकार के लेबर कमिश्नर इंद्रमणि त्रिपाठी और उनकी टीम ने विस्तार से बताया कि किन नियमों, शर्तों और प्रक्रियाओं के तहत श्रमिक परिवारों को मकानों का मालिकाना अधिकार दिया गया। उत्तर प्रदेश की टीम ने वहां की नीतियों, दस्तावेजों, कानूनी प्रक्रियाओं और विभागीय समन्वय के मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया।
प्रतिनिधिमंडल में मोदीनगर विधायक डॉ. मंजू सिवाच सहित यूपी श्रम विभाग के चार डिप्टी लेबर कमिश्नर भी शामिल रहे। टीम ने केवल बैठक तक ही अपने अध्ययन को सीमित नहीं रखा बल्कि उड़ीसा की विभिन्न श्रमिक कॉलोनियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन परिवारों से बातचीत की जो वर्षों से वहां रह रहे हैं और जिन्हें सरकार द्वारा मालिकाना हक दिया जा चुका है।
निरीक्षण के दौरान विधायक सुरेंद्र मैथानी ने स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव जाने। उन्होंने मिल श्रमिकों को आवंटित घरों की वर्तमान स्थिति देखी और वहां की व्यवस्थाओं को समझा। टीम ने अध्ययन के दौरान फोटो और वीडियो भी संकलित किए ताकि उत्तर प्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप एक व्यावहारिक और मजबूत रिपोर्ट तैयार की जा सके।
मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक मैथानी भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने जीवन के 42 वर्ष कानपुर की शास्त्री नगर लेबर कॉलोनी में बिताए हैं और वे श्रमिक परिवारों के दर्द को बेहद करीब से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों से वे संगठन और अब विधानसभा के माध्यम से इस लड़ाई को लगातार उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस मुद्दे पर भरोसा जताए जाने के बाद अब उम्मीद और मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल वर्तमान निवासियों को राहत देना नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित करना है। यदि मालिकाना हक की योजना लागू होती है तो हजारों परिवारों को स्थायी सुरक्षा मिलेगी और वे अपने घरों के वास्तविक स्वामी बन सकेंगे।
उड़ीसा दौरे से लौटने के बाद अब लखनऊ में राज्य परामर्शदात्री समिति की अहम बैठक प्रस्तावित है। इसमें उड़ीसा, दिल्ली और महाराष्ट्र के मॉडल का तुलनात्मक अध्ययन कर एक बिंदुवार एजेंडा तैयार किया जाएगा। इसके बाद तैयार रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार और कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जो भविष्य में ऐतिहासिक निर्णय का आधार बन सकती है।
प्रतिनिधिमंडल में विधायक सुरेंद्र मैथानी, डॉ. मंजू सिवाच, उप श्रमायुक्त शमीम अख्तर, पंकज राणा, राजेश मिश्रा, राकेश द्विवेदी सहित कई अधिकारी शामिल रहे। वहीं उड़ीसा सरकार की ओर से लेबर कमिश्नर इंद्रमणि त्रिपाठी, जॉइंट कमिश्नर पीके पात्रा और श्रम एवं आवास विभाग के 13 वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
विधायक मैथानी की सक्रियता और सरकार के इस प्रयास से अब कानपुर सहित उत्तर प्रदेश की तमाम लेबर कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों में नई उम्मीद जगी है। वर्षों से किरायेदार या अस्थायी निवासी की तरह जीवन बिता रहे लोग अब अपने घरों के मालिक बनने का सपना साकार होता देख रहे हैं।
लेबर कॉलोनियों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम