डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड़, करोड़ों की साइबर ठगी में दो गिरफ्तार

कानपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस की पनकी थाना पुलिस और पश्चिम जोन साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह से जुड़े दो अभियुक्तों जगदीशचंद्र गुप्ता और रोहित भसीन को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी बैंक खातों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से लोगों को डराकर साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार साइबर पोर्टल पर लगातार मिल रही शिकायतों और संदिग्ध बैंक खातों की जांच के आधार पर दोनों आरोपियों की पहचान की गई। जांच में पता चला कि आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाते थे और फिर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करते थे।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि अभियुक्त जगदीशचंद्र गुप्ता के नाम पर “बालाजी फाउंडेशन” के नाम से आईसीआईसीआई बैंक में संचालित खाते में करीब 10 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। पुलिस को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जिनमें एक ही ट्रांजैक्शन में लगभग 3.25 करोड़ रुपये खाते में प्राप्त हुए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार रोहित भसीन इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय सहयोगी की भूमिका निभा रहा था। आरोप है कि नोएडा स्थित आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी और म्यूल खाते खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में किया जाता था। पुलिस ने बताया कि संबंधित बैंक कर्मचारी मुकुल वर्मा और धीरज, जो शाखा प्रबंधक और डिप्टी शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे, उन्हें पूर्व में गुजरात पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह 16 अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर विभिन्न भाषाओं में लोगों से संपर्क करता था। आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे ताकि संदेह कम हो और आसानी से विश्वास कायम किया जा सके।
साइबर सेल के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क अखिल भारतीय स्तर पर फैला हुआ था। आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत आठ राज्यों से इस गिरोह के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आरोपी बैंक खातों की ट्रांजैक्शन लिमिट बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बढ़वाते थे और फिर RTGS तथा NEFT के जरिए रकम तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते थे, जिससे रकम का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अभियुक्त जगदीशचंद्र गुप्ता पहले बिजली चोरी के मामले में भी आरोपी रह चुका है, जबकि रोहित भसीन कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराध मामलों में वांछित बताया जा रहा है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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