कानपुर में अखिल भारतीय स्वर्णकार विकास परिषद की आपात बैठक, प्रधानमंत्री से ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ लागू करने और सर्राफा कारोबार पर सख्ती वापस लेने की मांग
कानपुर में अखिल भारतीय स्वर्णकार विकास परिषद की एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा सर्राफा कारोबार को लेकर लिए जा रहे संभावित कड़े फैसलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। परिषद के पदाधिकारियों और स्वर्णकार समाज के लोगों ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि ऐसे फैसले व्यापारियों के रोजगार और पारंपरिक कारोबार पर सीधा प्रहार हैं। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस कथित ‘तुगलगी फरमान’ को वापस लेने की मांग की गई।
बैठक परिषद के अध्यक्ष पुष्पेंद्र जायसवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में सोना केवल एक धातु नहीं बल्कि ‘स्त्री धन’ और सामाजिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। भारतीय परिवारों में सुख-दुख, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह और आकस्मिक संकटों में महिलाएं अपने पास सुरक्षित रखे सोने का उपयोग कर परिवार को संभालती हैं। ऐसे में सर्राफा कारोबार को प्रभावित करने वाले निर्णय आम जनता और छोटे व्यापारियों दोनों के लिए नुकसानदायक साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि ज्वेलर्स की दुकानों पर अनावश्यक सख्ती या प्रतिबंध लगाने से लाखों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। छोटे व्यापारी पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं और यदि इस तरह के कठोर नियम लागू किए गए तो हजारों परिवार बेरोजगारी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
बैठक में परिषद की ओर से केंद्र सरकार को कई सुझाव भी दिए गए। परिषद ने कहा कि यदि सरकार देशहित में आर्थिक सुधार चाहती है तो उसे व्यापारियों पर दबाव बनाने के बजाय वैकल्पिक नीतियों पर काम करना चाहिए। परिषद ने चीन से आयातित सामानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम की जानी चाहिए ताकि देश का पैसा देश में ही रहे।
इसके अलावा परिषद ने वीआईपी कल्चर समाप्त करने की भी मांग उठाई। पदाधिकारियों ने कहा कि सांसदों और विधायकों को मिलने वाली मुफ्त रेल यात्रा, हवाई यात्रा, मुफ्त फोन और कैंटीन जैसी सुविधाओं को समाप्त किया जाए। साथ ही नेताओं की सुरक्षा पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च में कटौती की जाए ताकि सरकारी खजाने पर भार कम हो सके।
बैठक में टैक्स व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। परिषद ने सुझाव दिया कि इनकम टैक्स समाप्त कर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ व्यवस्था लागू की जाए। उनका दावा था कि इससे कर प्रणाली सरल होगी और सरकार का राजस्व कई गुना बढ़ सकता है।
स्वर्णकार समाज के लोगों ने भावनात्मक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सर्राफा कारोबार प्रभावित हुआ तो क्या देश में शादी-विवाह और मांगलिक कार्य रुक जाएंगे? क्या कोई मां-बाप अपनी बेटी को मंगलसूत्र, बिछिया और अन्य पारंपरिक गहने दिए बिना विदा कर पाएंगे? बच्चों के जन्म पर दिए जाने वाले कड़े-पायल जैसी परंपराओं का क्या होगा?
परिषद ने सरकार से मांग की कि व्यापारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने के बजाय ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ को मजबूती से लागू किया जाए। उनका कहना था कि यदि लोगों के घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना बाजार और बैंकिंग व्यवस्था में आएगा तो सोने के आयात की आवश्यकता अपने आप कम हो जाएगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
बैठक में शीलू वर्मा, पंकज वर्मा, वेद गुप्ता, मनोज वर्मा, दुर्गेश सोनी, सर्वेश वर्मा, संजीव अजय वर्मा, अमित मिश्रा, राजन वर्मा और कमल वर्मा समेत बड़ी संख्या में स्वर्णकार समाज के पदाधिकारी और व्यापारी उपस्थित रहे।