320 करोड़ के जरीब चौकी आरओबी का भूमि पूजन, विकास के साथ उठा विरोध

फोरलेन पुल से बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, लेकिन 250 दुकानों पर संकट से व्यापारी नाराज

कानपुर। शहर के सबसे व्यस्त और जामग्रस्त इलाकों में शामिल जरीब चौकी में शुक्रवार को बहुप्रतीक्षित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) परियोजना का भूमि पूजन संपन्न हुआ। सांसद रमेश अवस्थी ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी। करीब 320 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज जीटी रोड को कालपी रोड से जोड़ेगा और शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, इस ऐतिहासिक परियोजना के भूमि पूजन के साथ ही विकास और व्यापार के बीच टकराव की तस्वीर भी सामने आई। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि और प्रशासन इसे कानपुर के विकास की नई पहचान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जरीब चौकी और हीरागंज के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटरों पर विरोध संबंधी पोस्टर चस्पा कर नाराजगी जाहिर की और नई डिजाइन को व्यापार के लिए घातक बताया।
सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार आरओबी का डिजाइन शहर के चारों प्रमुख मार्गों को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। परियोजना के तहत कुल चार रैंप बनाए जाएंगे, जिनमें दो रैंप जीटी रोड की ओर, एक कालपी रोड की ओर और एक घंटाघर रोड की ओर प्रस्तावित है। अधिकारियों का दावा है कि इस पुल के निर्माण के बाद रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले लंबे जाम से लोगों को राहत मिलेगी और अंतर-जनपदीय यातायात भी अधिक सुगम हो जाएगा।
जरीब चौकी रेलवे क्रॉसिंग पर हर दिन हजारों वाहनों का दबाव रहता है। ट्रेन गुजरने के दौरान लंबे समय तक फाटक बंद रहने से वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे आम लोगों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस ओवरब्रिज को शहर की जरूरत बताया जा रहा है।
दूसरी तरफ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने नई डिजाइन पर गंभीर आपत्ति जताई है। व्यापारियों का दावा है कि प्रस्तावित डिजाइन के कारण 250 से अधिक दुकानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उनका कहना है कि यदि पुल का निर्माण वर्तमान डिजाइन के अनुसार हुआ तो बाजार का रास्ता कई वर्षों तक प्रभावित रहेगा और कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय मिश्रा और सदस्य अरुण पांडेय ने कहा कि उनका विरोध विकास या सांसद रमेश अवस्थी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी भी शहर के विकास के पक्षधर हैं, लेकिन विकास ऐसा हो जिससे स्थानीय व्यापार और लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। व्यापारियों ने मांग की कि पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी के कार्यकाल में स्वीकृत पुरानी डिजाइन के आधार पर ही पुल का निर्माण कराया जाए।
व्यापारियों के अनुसार पुरानी डिजाइन में बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई गई थी, जबकि नई डिजाइन से सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान करीब तीन वर्षों तक बाजार का मार्ग प्रभावित रहेगा, जिससे छोटे दुकानदार आर्थिक रूप से बर्बाद हो सकते हैं।
भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों की भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे शहर के विकास के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने व्यापारियों की चिंता को भी जायज ठहराया। अब सबकी निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि विकास और व्यापार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।

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