सीएम ग्रिड योजना में धांधली का आरोप, जांच की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

कानपुर नगर। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी सीएम ग्रिड योजना में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। क्षेत्रीय संयोजक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सुरेश गुप्ता के नेतृत्व में सोहेलदेव पार्टी के मोहम्मद उस्मान सहित अन्य पदाधिकारियों ने नगर निगम और ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए।
ज्ञापन में कहा गया कि नगर के विकास और यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से सीएम ग्रिड योजना के तहत लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से 10 प्रमुख सड़कों के उच्चीकरण और निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य शहरवासियों को जाम से राहत दिलाना और आपातकालीन सेवाओं, विशेषकर एंबुलेंस, की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।
हालांकि आरोप लगाया गया कि यह कार्य कई महीनों से कछुआ चाल में और घटिया गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। ठेकेदार मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीन पार्क से घंटाघर तक चल रहे प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जहां पैदल चलने के लिए फुटपाथ थे, उन्हें अत्यधिक चौड़ा कर दिया गया है, लेकिन उन पर अतिक्रमण शुरू हो गया है। मीट और खानपान की दुकानों द्वारा फुटपाथ पर कब्जा कर कुर्सियां लगाई जा रही हैं, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो गया है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सड़कों को चौड़ा करने के बजाय संकरा किया जा रहा है। 14 मीटर चौड़ी सड़क को घटाकर लगभग 9 मीटर कर दिया गया है, जबकि इस मार्ग पर ग्रीन पार्क स्टेडियम से लेकर घंटाघर तक भारी यातायात रहता है। यह मार्ग रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से जुड़ा होने के कारण पहले से ही व्यस्त रहता है, ऐसे में सड़क का संकरा होना जाम की समस्या को और बढ़ा सकता है।
नवीन मार्केट और आनंदेश्वर मंदिर को जोड़ने वाली सड़क का भी जिक्र करते हुए बताया गया कि यहां स्कूल और दफ्तरों की अधिकता के कारण यातायात दबाव अधिक रहता है। यदि दो स्कूल बसें एक साथ निकलती हैं तो जाम लगना तय है। साथ ही नगर निगम और जल निगम के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए कहा गया कि दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि सड़क और नालियों के निर्माण के बाद सड़क और संकरी हो जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि जहां-जहां खुदाई की जा रही है, वहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। न तो बैरिकेडिंग की व्यवस्था है और न ही धूल रोकने के लिए हरे जाल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। स्वरूप नगर और पुराना सेल टैक्स रोड जैसे पॉश इलाकों में भी अधूरा काम और अव्यवस्था देखने को मिल रही है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक आधा काम भी नहीं हो पाया है। साथ ही आईआईटी द्वारा कुछ कार्यों को दोषपूर्ण बताए जाने की बात भी कही गई, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
इस दौरान जिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि फुटपाथ पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां खुदाई होगी वहां बैरिकेडिंग और हरे जाल की व्यवस्था की जाएगी, ताकि धूल न फैले और लोगों को असुविधा न हो। साथ ही उन्होंने गुणवत्ता की जांच कराने का भी भरोसा दिलाया।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शहर का विकास सही मायनों में हो सके।

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