कानपुर के सिनेमाघरों में औंधे मुंह गिरी फिल्म, वीकेंड पर भी खाली रहीं कुर्सियां, मेकर्स की बढ़ी धड़कनें
कानपुर-बड़े-बड़े दावों और सामाजिक सरोकार का वास्ता देकर शहर के सिनेमाघरों में उतरी फिल्म ‘सुजाता’ का हश्र पहले तीन दिनों में ही बेहद फीका नजर आ रहा है आलम यह है कि ओपनिंग वीकेंड, जिसे किसी भी फिल्म के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है, उसमें भी ‘सुजाता’ दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही। कानपुर के टॉकीजों में सन्नाटा पसरा है और फिल्म की रफ्तार कछुए से भी धीमी बनी हुई है शुक्रवार को रिलीज हुई इस फिल्म से उम्मीद थी कि रविवार तक यह अपनी पकड़ मजबूत कर लेगी, लेकिन इसके उलट कई शोज में तो गिनती के दर्शक ही नजर आए सिनेमाघर सूत्रों की मानें तो नोवेल्टी टॉकीज में फिल्म की शुरुआत इतनी ठंडी रही है कि आगे की राह मुश्किल नजर आ रही है हालांकि, इसे श्याम पैलेस और लाल पैलेस जैसे बड़े टॉकीजों में भी लगाने की योजना है, लेकिन मौजूदा ‘फ्लॉप शो’ को देखते हुए फिल्म के भविष्य पर काले बादल मंडराने लगे हैं फिल्म के लेखक और निर्माता संतोष गुप्ता ने ‘सुजाता’ के जरिए समाज को एक संदेश देने की कोशिश तो की, लेकिन लगता है कि दर्शकों को यह ‘ज्ञान’ रास नहीं आया। कहानी और प्रस्तुति इतनी कमजोर रही कि रवि शर्मा का निर्देशन भी इसे डूबने से नहीं बचा सका मुख्य भूमिका में नजर आईं देविका सिंह और अजय त्रिपाठी की जोड़ी भी पर्दे पर वो ‘स्पार्क’ पैदा नहीं कर पाई, जिसकी उम्मीद कानपुरिया दर्शकों को थी फिलहाल तो शुरुआती रुझान फिल्म के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं सिनेमा पंडितों का कहना है कि अगर फिल्म की रफ्तार यही रही, तो अगले हफ्ते तक इसे सिनेमाघरों से उतारने की नौबत आ सकती है अब देखना यह है कि क्या ‘वर्ड ऑफ माउथ’ के जरिए सुजाता अपनी साख बचा पाती है या फिर यह कानपुर के बॉक्स ऑफिस पर गुमनामी के अंधेरे में खो जाएगी सिनेमाघरों के बाहर खाली पड़े स्टैंड और सूने पड़े टिकट काउंटर गवाह हैं कि ‘सुजाता’ का जादू कानपुर की जनता पर नहीं चल पाया है अब सारी उम्मीदें फिल्म की अगली स्क्रीनिंग और चमत्कारी प्रचार पर टिकी हैं