कानपुर के गोलाघाट क्षेत्र में युवक की हत्या के बाद दो दिनों तक मुकदमा दर्ज न होने से आक्रोश भड़क उठा। परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर शव रखकर जाम लगाया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई।
कानपुर के गोलाघाट इलाके में युवक मोनू पुत्र ओम कैलाश की हत्या के मामले में पुलिस की देरी से नाराज़ परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। घटना के दो दिन बाद भी हत्या का मुकदमा दर्ज न होने और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया।
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों की मांग थी कि तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
मामले को बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता को मौके पर बुलाया। उनके पहुंचने के बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की और परिजनों की मांगों को मजबूती से रखा। इसके बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ा और पुलिस ने आनन-फानन में नामजद हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया।
बताया गया कि डीसीपी पूर्वी, एसीपी कैंट और एसएचओ कैंट समेत कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले मोबाइल फोन पर एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि दिखाई और बाद में उसकी कॉपी भी उपलब्ध कराई।
एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष पवन गुप्ता ने परिजनों और प्रदर्शनकारियों को समझाया, जिसके बाद सड़क से शव हटाया गया और जाम खत्म हुआ।
पवन गुप्ता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के गंभीर मामलों में इतनी देरी नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार को समय पर न्याय मिलना बेहद जरूरी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
गोलाघाट हत्याकांड: विरोध के बाद दर्ज हुई FIR