नन्हीं उम्र, कंधों पर परिवार का बोझ: बहन की जिंदगी बचाने कानपुर पहुंचा मासूम

कक्षा 5 का छात्र बना सहारा—डॉक्टरों को सुनाई पूरी मेडिकल हिस्ट्री, विधायक और सामाजिक संगठनों ने थामा हाथ

कानपुर:
भीड़भाड़ वाले अस्पताल के उस गेट पर जब एक दुबला-पतला मासूम अपनी बीमार बहन को संभालते हुए अंदर दाखिल हुआ, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह बच्चा एक ऐसी कहानी अपने साथ लेकर आया है, जो हर दिल को छू जाएगी।
प्रतापगढ़ जिले के बाबूगंज (डेरवा लालगंज) का रहने वाला कक्षा 5 का यह छात्र, उम्र में भले ही छोटा हो, लेकिन जिम्मेदारियों का बोझ उसके कंधों पर किसी बड़े इंसान से कम नहीं है। पिता का साया सिर से उठ चुका है और मां दिव्यांग हैं—ऐसे में अपनी बड़ी बहन की जिंदगी बचाने का जिम्मा उसने खुद उठा लिया।
करीब डेढ़ महीने से वह अपनी बहन के दिल में छेद की गंभीर बीमारी का इलाज कराने के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहा था। कभी पैसों की कमी आड़े आई, तो कभी व्यवस्था की जटिलताएं, लेकिन इस बच्चे के हौसले ने हार नहीं मानी। चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी, मगर आंखों में उम्मीद की चमक अब भी बरकरार थी।
इस संघर्ष के बीच इंसानियत की एक मिसाल भी सामने आई। ‘देवदूत वानर सेना’ और ‘इंसानियत ग्रुप’ ने इस बच्चे के लिए देवदूत बनकर काम किया। संरक्षक अजीत प्रताप सिंह के आह्वान पर संस्थापक सुमित सिंह चौहान और उनकी टीम ने पहल करते हुए बच्ची को प्रयागराज से कानपुर के हृदय रोग संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
पहचान से पहले सम्मान
कार्डियोलॉजी के गेट पर पहुंचते ही जब बच्चे ने इंसानियत ग्रुप के सदस्य मुन्ना चौहान को बिना किसी औपचारिक परिचय के पहचान लिया और झुककर उनके पैर छू लिए, तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो उठा। उस क्षण ने यह साबित कर दिया कि संस्कार और संवेदनाएं उम्र की मोहताज नहीं होतीं।
डॉक्टर भी रह गए हैरान
अस्पताल के भीतर जब डॉक्टरों ने बच्चे से उसकी बहन की बीमारी के बारे में पूछा, तो उन्होंने जो सुना, वह चौंकाने वाला था। इस छोटे से बालक ने बिना किसी कागज के अपनी बहन की पूरी मेडिकल हिस्ट्री विस्तार से सुना दी—कब जांच हुई, क्या रिपोर्ट आई, कौन-कौन से लक्षण हैं—सब कुछ। डॉक्टरों ने भी माना कि इतनी समझ और जिम्मेदारी इस उम्र में विरले ही देखने को मिलती है।
कागजों पर भी दिखी जिम्मेदारी
इलाज के दौरान जब दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की जरूरत पड़ी, तो बच्चे ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा—“मेरी मां अंगूठा लगाती हैं, हस्ताक्षर मैं और मेरे चाचा करेंगे।” उसके इस आत्मविश्वास और जिम्मेदारी ने हर किसी को प्रभावित किया।
मदद के लिए बढ़े हाथ
गोविंद नगर विधानसभा के विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरा सहयोग दिया। उनके हस्तक्षेप और सामाजिक संगठनों के समन्वय से अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इलाज शुरू कराया।
इलाज जारी, उम्मीद बरकरार
डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची के सीने में गंभीर संक्रमण है, जिसका इलाज प्राथमिकता पर किया जा रहा है। संक्रमण नियंत्रित होने के बाद दिल के छेद के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी में है और हर संभव प्रयास कर रही है।
अस्पताल में चर्चा का विषय बना मासूम
अस्पताल के वार्ड में यह बच्चा अब चर्चा का केंद्र बन चुका है। मरीजों के परिजन, डॉक्टर और स्टाफ—हर कोई उसके साहस और समर्पण की सराहना कर रहा है। कई लोग उसकी मदद के लिए आगे भी आ रहे हैं।
एक कहानी, कई संदेश
यह सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं, बल्कि उस हौसले की मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी झुकता नहीं। यह कहानी बताती है कि जिम्मेदारी उम्र नहीं देखती, और जब इंसानियत साथ हो, तो सबसे मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद