80 करोड़ साइबर ठगी का पर्दाफाश, पंजाब से दो आरोपी गिरफ्तार

कानपुर। थाना नौबस्ता पुलिस और लखनऊ एसटीएफ की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को पंजाब के फाजिल्का जिले से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह शेयर ट्रेडिंग और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर के लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। जांच में सामने आया है कि गिरोह के एक मुख्य बैंक खाते में मात्र तीन महीने के भीतर 80 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब नौबस्ता निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे फेसबुक के माध्यम से ‘श्रद्धा शक्ति’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया, जहां शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। झांसे में आकर पीड़ित ने करीब 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद संबंधित ऐप बंद हो गया और संपर्क टूट गया।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी की रकम को पांच अलग-अलग परतों (लेयर्स) में घुमाकर दिल्ली के एक बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उक्त खाता अजय कुमार नामक व्यक्ति के नाम पर था, जो पेशे से मोची है, लेकिन खाते का संचालन मुख्य आरोपी करण कसेरा और गुलशन कुमार द्वारा किया जा रहा था। यह खाता नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, दिल्ली में संचालित था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस एक खाते के खिलाफ देशभर में 600 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 13 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इन मुकदमों में करीब 26 करोड़ रुपये की ठगी का विवरण सामने आया है। पुलिस के अनुसार जांच में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है और गिरोह के तार विदेशी नंबरों से भी जुड़े हुए हैं। भारी लेन-देन को देखते हुए आयकर विभाग ने भी नोटिस जारी किया है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान करण कसेरा (31) और गुलशन कुमार (29) निवासी अबोहर, जिला फाजिल्का (पंजाब) के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ‘लिटिल मोंगा’ और ‘कालरा’ नामक सरगनाओं के निर्देश पर टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देते थे।
पुलिस से बचने के लिए गिरोह ठगी की रकम को 5-6 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से नकदी निकालकर आपस में बांट लेता था। हाल ही में इस गिरोह ने एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठे थे।
इस सफलता में प्रभारी निरीक्षक बहादुर सिंह (नौबस्ता), एसटीएफ लखनऊ के उपनिरीक्षक नरेंद्र सिंह, नितिन यादव और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों और संदिग्ध बैंक कर्मियों की तलाश में जुटी है।

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