कानपुर:
उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में प्रशासन ने अनुशासन और कार्यकुशलता को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट में तैनात तीन कनिष्ठ लिपिकों (बाबू) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पदावनत कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया। यह कार्रवाई अनिवार्य टाइपिंग परीक्षा में बार-बार असफल रहने के कारण की गई।
जानकारी के अनुसार, जिन कर्मचारियों पर यह कार्रवाई हुई है, उनमें प्रेमनाथ यादव, अमित यादव और नेहा श्रीवास्तव शामिल हैं। तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत कनिष्ठ लिपिक पद पर हुई थी। नियमों के तहत ऐसे कर्मचारियों के लिए निर्धारित समय सीमा में टाइपिंग टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इन कर्मचारियों को अपनी दक्षता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे। पहली बार टाइपिंग परीक्षा में असफल होने पर प्रशासन ने नरमी दिखाते हुए उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) रोक दी थी और सुधार का मौका दिया था। इसके बावजूद हाल ही में आयोजित दूसरी परीक्षा में भी तीनों कर्मचारी निर्धारित गति और शुद्धता हासिल नहीं कर सके। बार-बार अवसर मिलने के बावजूद अनिवार्य योग्यता पूरी न करने पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सेवा नियमावली के तहत तीनों को तृतीय श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी पद पर पदावनत कर दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सरकारी सेवा में दक्षता अनिवार्य है और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट के इतिहास में संभवतः यह पहला मामला है, जब एक साथ तीन लिपिकों को टाइपिंग न आने के कारण चपरासी बना दिया गया। इस कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर सहित अन्य सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन का यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए सख्त चेतावनी माना जा रहा है, जो प्रोबेशन अवधि या अनिवार्य परीक्षाओं को गंभीरता से नहीं लेते।
टाइपिंग टेस्ट में फेल 3 बाबू बने चपरासी, डीएम का सख्त एक्शन