अपना घर आश्रम में मौत पर बवाल, अंग तस्करी व गुपचुप अंतिम संस्कार के आरोप

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त, डीएम- कमिश्नर से मांगी 15 दिन में रिपोर्ट

कानपुर। सेन पश्चिम पारा स्थित ‘अपना घर आश्रम’ एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आश्रम में रह रहे एक अधेड़ व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और परिजनों को बिना सूचना दिए कथित रूप से गुपचुप अंतिम संस्कार किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कानपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
तिवारीपुर निवासी विमला पासवान ने आश्रम प्रबंधन पर अपने पति ओमप्रकाश की हत्या कर मानव अंगों की तस्करी करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि उनके पति को जबरन आश्रम में रखा गया था और उनकी मौत के बाद न तो परिवार को सूचित किया गया और न ही शव दिखाया गया। इससे उन्हें संदेह है कि उनके पति के शरीर से किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग निकाल लिए गए।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम के पास अपनी एम्बुलेंस है, जिसके जरिए शहर और आसपास के इलाकों से गरीब, लावारिस और असहाय लोगों को लाया जाता है। उनका दावा है कि इन लोगों को कभी अस्पताल नहीं ले जाया जाता, बल्कि समय-समय पर आश्रम से 2-4 शवों को लावारिस बताकर अज्ञात स्थानों पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाता है। इस पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला अगस्त 2025 का बताया जा रहा है, लेकिन पीड़िता के अनुसार स्थानीय स्तर पर शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा, उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि आश्रम संचालकों से सांठगांठ कर मामले को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि लगातार प्रयासों के बाद अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
वहीं, आश्रम के सचिव जेपी सिंह और संचालक उमा शुक्ला ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि मृतक गंभीर रूप से बीमार था और उसकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पीड़िता शिकायत वापस लेने के एवज में लाखों रुपये की मांग कर रही है और ब्लैकमेलिंग कर रही है।
फिलहाल एडीसीपी साउथ योगेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस आश्रम के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, एम्बुलेंस के उपयोग और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। साथ ही पीड़िता और अन्य संभावित गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस दोनों पर निष्पक्ष व पारदर्शी जांच का दबाव बढ़ गया है। अब सभी की निगाहें आयोग की निगरानी में चल रही जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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