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कानपुर। शिया जामा मस्जिद मकबरा ग्वालटोली कानपुर में मुसल्लियान ए शिया की ओर से रहबर-ए-मोअज्जम अयातुल्लाह सैय्यद अली खमेनेई की शहादत पर तज़ियाती जलसा व मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर श्रद्धांजलि अर्पित की और गहरा शोक व्यक्त किया।
कार्यक्रम की सरपरस्ती हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली अब्बास खान नजफी, इमाम-ए-जुमा कानपुर ने की, जबकि तज़ियाती जलसे का संचालन कमबर रिज़वी ने किया। मजलिस में शहर के विभिन्न शिया धर्मगुरुओं ने तकरीर करते हुए अयातुल्लाह सैय्यद अली खमेनेई के जीवन, उनके संघर्ष और मजलूमों के हक में उठाई गई आवाज़ों को याद किया।
मजलिस को खिताब करते हुए शिया शहर काज़ी मौलाना सईद अब्बास खान ने कहा कि अयातुल्लाह सैय्यद अली खमेनेई शिया समुदाय के वरिष्ठ धर्मगुरु थे और उन्होंने मौला अली अलैहिस्सलाम की शिक्षाओं पर चलते हुए पूरी दुनिया में मजलूमों की आवाज़ बुलंद की। उन्होंने कहा कि गाज़ा में इजराइल द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ भी उन्होंने हमेशा खुलकर आवाज़ उठाई और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े रहे। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत पूरी उम्मत के लिए एक बड़ा नुकसान है।
इस अवसर पर नमाज़-ए-जुमा के दौरान मस्जिद में मौजूद नमाज़ियों ने अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और शहीद नेता को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस में मौलाना इंतेखाब आलम काज़मी, मौलाना बशीर हैदर, मौलाना फाजिल हुसैन नजफी, मौलाना नुसरत आब्दी और मौलाना मेराज अली जाफरी समेत अन्य धर्मगुरुओं ने भी तकरीर करते हुए उनके जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला तथा अकीदतमंदों से उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।
शिया जामा मस्जिद में तज़ियाती मजलिस