विवि में गुणवत्ता उन्नयन पर मंथन

कानपुर।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में शुक्रवार को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने के उद्देश्य से “महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता उन्नयन पर एनआईआरएफ और नैक मूल्यांकन” विषय पर एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं महाविद्यालय विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न जनपदों के महाविद्यालयों के प्राचार्य, IQAC समन्वयक और शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण U-CARES (यू-सीएआरईएस) योजना की घोषणा रही। इस योजना के अंतर्गत नैक प्रत्यायन के लिए आवेदन करने वाले पहले 25 महाविद्यालयों को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संबद्ध महाविद्यालयों में प्रत्यायन संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक वातावरण में गुणवत्ता ही किसी भी संस्थान की पहचान है। उन्होंने संबद्ध महाविद्यालयों से आह्वान किया कि वे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में ठोस और योजनाबद्ध कदम उठाएं तथा नैक प्रत्यायन और एनआईआरएफ रैंकिंग को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
IQAC के निदेशक प्रो. संदीप कुमार सिंह ने NAAC और NIRF की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्यायन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संस्थागत आत्ममूल्यांकन और सतत सुधार की प्रक्रिया है। उन्होंने दस्तावेजीकरण, डेटा संग्रह, आंतरिक समन्वय और टीम वर्क के महत्व को रेखांकित किया तथा बताया कि किस प्रकार सुनियोजित तैयारी से बेहतर ग्रेड और रैंकिंग प्राप्त की जा सकती है।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, नवाचार, छात्र प्रगति, पारदर्शी प्रशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व से बनती है। उन्होंने महाविद्यालयों से अपील की कि वे गुणवत्ता आश्वासन को केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि अपनी स्थायी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाएं। कुलपति ने कहा कि यू-सीएआरईएस योजना का उद्देश्य महाविद्यालयों को व्यवस्थित तैयारी और दीर्घकालिक गुणवत्ता सुधार के लिए प्रेरित करना है।
कार्यशाला में नैक को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि नैक केवल मूल्यांकन नहीं, बल्कि सतत गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शिक्षण-अधिगम को अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाना, शोध, नवाचार एवं विस्तार गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा IQAC की सक्रिय भूमिका के माध्यम से आंतरिक शैक्षणिक समीक्षा को सुदृढ़ करना है। साथ ही पीयर टीम विज़िट के लिए संस्थागत तैयारी के विभिन्न पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया गया।

एनआईआरएफ सत्र के दौरान बताया गया कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग प्रणाली है, जिसमें सही, प्रमाणिक और समयबद्ध आंकड़ों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षण गुणवत्ता, शोध प्रकाशन, स्नातक परिणाम, प्लेसमेंट और सामाजिक प्रभाव जैसे मानकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी अशोक कुमार त्रिपाठी, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा भी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा एवं औरैया जनपदों के संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, IQAC समन्वयक एवं शिक्षकगण ने सक्रिय सहभागिता की।
नैक मानक समन्वयकों में डॉ. विशाल अवस्थी, डॉ. प्रकाश चन्द्र गुप्ता, डॉ. विशाल चंद एवं डॉ. अभिषेक चंद्र की सक्रिय उपस्थिति रही, जबकि एनआईआरएफ समन्वयक डॉ. राकेश कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। कार्यशाला में पीपीएन कॉलेज से प्रो. सुमन सिंह, प्रो. आभा सिंह, ए.एन.डी. कॉलेज से प्रो. अंजिता सिंह तथा बीएनडी कॉलेज से विवेक द्विवेदी ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन IQAC के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रवीन कटियार ने किया। समापन अवसर पर यह कहा गया कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय की गुणवत्ता उन्नयन, पारदर्शिता और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है और आने वाले समय में इससे संबद्ध महाविद्यालयों को नैक एवं एनआईआरएफ में बेहतर प्रदर्शन करने की दिशा में ठोस मार्गदर्शन मिलेगा।

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