कानपुर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मंगलवार अपराह्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) उत्तरीपुरा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत सामने आई, जहां गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक शिथिलता पाई गई। कुल सात तैनात कर्मचारियों में से केवल तीन ही ड्यूटी पर उपस्थित मिले, जबकि चार स्वास्थ्यकर्मी बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए।
अनुपस्थित कर्मचारियों में डॉ. प्रीति सचान (मेडिकल ऑफिसर), रामानुज (वार्ड बॉय) और कु. ज्योति (स्टाफ नर्स) शामिल रहीं। जिलाधिकारी ने तीनों को अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। वहीं चीफ फार्मासिस्ट अशोक श्रीवास्तव का अवकाश आवेदन पत्र उपलब्ध तो पाया गया, लेकिन उसे न तो विधिवत रजिस्टर में दर्ज किया गया था और न ही सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया था। इस प्रक्रिया को अनियमित मानते हुए उनका भी एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान ओपीडी रजिस्टर भी शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। नियमानुसार प्रत्येक मरीज के नाम के साथ उसका मोबाइल नंबर दर्ज किया जाना अनिवार्य है, लेकिन रजिस्टर में यह प्रविष्टियां लगातार गायब मिलीं। मौके पर उपस्थित आयुष चिकित्सक डॉ. सरिता कटियार निर्धारित ओपीडी रजिस्टर के स्थान पर एक अन्य रजिस्टर का उपयोग कर रही थीं, जिसमें मरीजों के मोबाइल नंबर अंकित नहीं थे। इस गंभीर त्रुटि पर जिलाधिकारी ने उनसे स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली भी संचालित नहीं पाई गई, जबकि इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाना है। परिसर और कक्षों में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। गंदगी और अव्यवस्था को देखकर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि पीएचसी उत्तरीपुरा के नियमित पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हौर के एमओआईसी तथा प्रभारी एसीएमओ द्वारा नियमित निरीक्षण और निगरानी न किए जाने पर दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए, एमओआईसी स्तर पर जवाबदेही तय की जाए और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में ठोस सुधार कराया जाए, ताकि आम जनता को समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।