व्यापारियों की हुंकार, सरकार को चेतावनी—मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और तेज

कानपुर। व्यापारियों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश ने प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का औपचारिक आगाज कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप शुक्ला के नेतृत्व में संगठन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से सौंपते हुए सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। यह आंदोलन हाल ही में कानपुर में आयोजित प्रादेशिक व्यापारी महासम्मेलन में लिए गए निर्णयों के अनुपालन में शुरू किया गया है।
ज्ञात हो कि 29 जनवरी को कानपुर में आयोजित इस महासम्मेलन में प्रदेशभर से आए व्यापारी नेताओं ने एकजुट होकर व्यापारियों की समस्याओं पर मंथन किया था। सम्मेलन में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि व्यापारियों की आवाज को मजबूती से सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में एक साथ ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसी क्रम में अब संगठन के पदाधिकारियों ने पूरे प्रदेश में ताकत झोंकते हुए यह अभियान शुरू किया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप शुक्ला ने बताया कि ज्ञापन देने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संगठन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री से भेंट कर व्यापारियों की समस्याओं पर सीधी बातचीत करेगा और मांगों के समाधान के लिए ठोस कार्यवाही की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार ने व्यापारियों की अनदेखी की तो इसे और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।
संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में व्यापारियों के अस्तित्व से जुड़ी कई गंभीर मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है। इसमें ऑनलाइन शॉपिंग पर तत्काल रोक लगाने या फिर स्थानीय व्यापारियों को जीएसटी एवं आयकर में विशेष छूट देने की मांग की गई है। साथ ही ई-वे बिल की सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये से शुरू करने, व्यापारियों की सुरक्षा के लिए ‘व्यापारी सुरक्षा आयोग’ के तत्काल गठन की मांग रखी गई है।
ज्ञापन में ब्रांडेड गल्ले को टैक्स फ्री करने, मंडी शुल्क पूरी तरह समाप्त करने और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग भी शामिल है। छोटे दुकानदारों और फेरीवालों के लिए स्पष्ट विस्थापन नीति बनाने और उन्हें पक्की दुकानें आवंटित करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा हस्त निर्मित पीतल उद्योग को लघु उद्योग का दर्जा देने, व्यापारियों के लिए पेंशन योजना लागू करने, बीमा राशि को दोगुना करने और बैंकों से रियायती दरों पर आसान ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
व्यापारियों ने जीएसटी अधिकारियों द्वारा छापेमारी के नाम पर उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया और समस्याओं के समाधान के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जटिल नियमों और भय के माहौल में व्यापारी काम करने को मजबूर है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान संगठन की एकजुटता साफ देखने को मिली। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष जेपी यादव, राष्ट्रीय सचिव रजत सिंह गौर, सेंट्रल यूपी अध्यक्ष अनिल शुक्ला, पूर्व पार्षद कीर्ति अग्निहोत्री, मंडल प्रभारी आशीष त्रिवेदी, महिला जिलाध्यक्ष मधु सिंह, युवा नगर अध्यक्ष आकाश जायसवाल, जिला महासचिव शरीक अहमद, राष्ट्रीय सचिव राम शंकर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान अनुज शुक्ला ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन आज वही व्यापारी ऑनलाइन बाजार और जटिल जीएसटी नियमों के बीच पिस रहा है। अगर सरकार ने समय रहते व्यापारियों की मांगों को नहीं माना, तो आंदोलन को और तेज व व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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