कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ

कानपुर।
राजकीय बालिका विद्यालय, चुन्नीगंज में मंगलवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का भव्य शुभारंभ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा बच्चों को पेट के कीड़े (कृमि) की दवा खिलाकर किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें कृमि संक्रमण से होने वाले दुष्प्रभावों, इसके लक्षणों तथा बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित रूप से कृमि मुक्ति की दवा देना उनके शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह अभियान स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
जिलाधिकारी ने कहा कि पेट के कीड़े बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी पैदा कर देते हैं, जिससे एनीमिया, कमजोरी, पढ़ाई में एकाग्रता की कमी और शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। ऐसे में समय-समय पर कृमि मुक्ति दवा का सेवन बच्चों को इन बीमारियों से सुरक्षित रखता है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे इस अभियान को गंभीरता से लें और अपने बच्चों को दवा अवश्य दिलवाएं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान 10 फरवरी को पूरे जनपद में चलाया गया है, जिसमें शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सरकारी, गैर-सरकारी एवं निजी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत बच्चों और किशोरों को कृमि मुक्ति की दवा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें शिक्षा विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार घर-घर और विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को दवा उपलब्ध करा रही हैं।उन्होंने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश 10 फरवरी को दवा लेने से वंचित रह जाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉपअप राउंड के अंतर्गत दवा खिलाई जाएगी, ताकि कोई भी पात्र बच्चा इस अभियान से छूट न पाए।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमित रस्तोगी ने दवा की खुराक के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि
1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली पीसकर,
2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली पीसकर,
तथा 3 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक गोली चबाकर दी जाएगी।उन्होंने बताया कि दवा पूरी तरह सुरक्षित है और स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में ही दी जा रही है। किसी भी प्रकार की असुविधा या जानकारी के लिए अभिभावक टोल फ्री नंबर 18001803024 पर संपर्क कर सकते हैं।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। बच्चों को स्वच्छता, हाथ धोने की आदत, साफ पानी पीने और खुले में शौच न करने के महत्व के बारे में भी समझाया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता और कृमि मुक्ति दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कैलाश चंद्र, विद्यालय के प्रधानाचार्य मंगलम गुप्ता, डीसीपीएम योगेंद्र सिंह पाल, डीईआईसी मैनेजर अजित सिंह, डीपीएम अश्वनी गौतम सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक एवं छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में सभी ने बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए कृमि मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।

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