स्मार्ट सिटी की सूरत पर ‘कचरे’ का दाग: साकेत नगर में नगर निगम ने खुद बनाया डंपिंग यार्ड

स्वच्छता के दावों की खुली पोल, दीप तिराहे पर कूड़े के पहाड़ से बदहाल हुआ जनजीवन
कानपुर। एक तरफ कानपुर को ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के पॉश और व्यस्ततम इलाकों में शामिल साकेत नगर के दीप तिराहे पर नगर निगम के ही सफाई कर्मचारियों ने सड़क किनारे अवैध रूप से कचरा डंप कर क्षेत्र को बदबू और बीमारी का केंद्र बना दिया है। महीनों से जमा कूड़े के ढेर ने न सिर्फ इलाके की सुंदरता को दागदार किया है, बल्कि स्थानीय लोगों और राहगीरों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
दीप तिराहा साकेत नगर का एक प्रमुख चौराहा है, जहां से प्रतिदिन हजारों वाहन, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और पैदल यात्री गुजरते हैं। इसी चौराहे के पास सड़क किनारे नगर निगम के सफाई कर्मी नियमित रूप से कचरा डाल रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कर्मचारी केवल आसपास का ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों से भी कूड़ा लाकर यहीं जमा कर देते हैं। देखते ही देखते यह स्थान एक स्थायी और अवैध डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुका है।
कूड़े के इस विशाल ढेर से उठने वाली दुर्गंध इतनी तीव्र है कि आसपास के घरों और दुकानों में रहना दूभर हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि बदबू के कारण ग्राहक दुकान में रुकना तक नहीं चाहते, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं, स्थानीय निवासी मजबूरी में नाक ढंककर घर से बाहर निकलने को विवश हैं। कई लोगों ने बताया कि गर्मी और उमस के साथ यह समस्या और भी भयावह हो जाती है।
खुले में पड़े कचरे पर आवारा पशुओं, कुत्तों और सूअरों का जमावड़ा लगा रहता है, जो कचरे को और फैलाकर पूरे क्षेत्र को गंदगी से भर देते हैं। इसके अलावा मच्छर, मक्खियां और कीड़े-मकोड़े तेजी से पनप रहे हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या की शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। न तो कचरा हटाया गया और न ही यहां डंपिंग रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था की गई। लोगों का कहना है कि नगर निगम की यह उदासीनता दर्शाती है कि स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत अभियान केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गए हैं।
स्मार्ट सिटी के नाम पर जहां आधुनिक सुविधाओं, स्वच्छ सड़कों और बेहतर जीवन स्तर के दावे किए जाते हैं, वहीं साकेत नगर का यह हाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में पूरा इलाका गंभीर स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ सकता है।
आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द इस अवैध डंपिंग यार्ड को हटाकर क्षेत्र की नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे नगर निगम के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे। लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
फिलहाल साकेत नगर का दीप तिराहा नगर निगम की लचर सफाई व्यवस्था और स्मार्ट सिटी के खोखले दावों की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

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