कानपुर।
स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) एवं केनव्यू के सहयोग से संचालित “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के अंतर्गत सेवा प्रदाताओं के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में सोमवार को प्रारंभ हुई, जिसका समापन मंगलवार को हुआ।
इस अभिमुखीकरण कार्यशाला में जनपद के 46 मेडिकल ऑफिसर एवं 63 स्टाफ नर्सों ने सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सेवा प्रदाताओं को डायरिया से संबंधित अद्यतन जानकारी प्रदान करना तथा उनके माध्यम से समुदाय को डायरिया की रोकथाम, सही उपचार एवं समय पर चिकित्सकीय परामर्श के लिए प्रेरित करना रहा। विशेष रूप से ओआरएस एवं जिंक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा बच्चों में डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु को रोकने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम प्रदेश के 13 जनपदों, जिनमें कानपुर भी शामिल है, में संचालित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु दर को शून्य पर लाना तथा दस्त प्रबंधन को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत नहीं होनी चाहिए और इस लक्ष्य को हासिल करने में मेडिकल ऑफिसर एवं स्टाफ नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभिमुखीकरण कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. कैलाश ने की। उन्होंने डायरिया से बचाव और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। उन्होंने लोगों से घर एवं आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, बच्चों को कुछ भी खिलाने-पिलाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोने, तथा भोजन को ढककर रखने की अपील की ताकि उस पर मक्खियां न बैठ सकें।
डॉ. कैलाश ने कहा कि बच्चों को टीकाकरण सारणी के अनुसार सभी टीके अवश्य लगवाएं तथा रोटावायरस एवं विटामिन ‘ए’ की खुराक लेना न भूलें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डायरिया ठीक होने के बाद भी जिंक की खुराक 14 दिनों तक जारी रखना अत्यंत आवश्यक है। पीने के पानी की स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने पानी निकालने के लिए डंडीदार लोटे के प्रयोग की सलाह दी, जिससे पानी दूषित न हो।
उन्होंने बताया कि छह माह से कम उम्र के बच्चों को दस्त होने की स्थिति में भी स्तनपान बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे जारी रखना चाहिए। डायरिया के दौरान ओआरएस के नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी को रोका जा सकता है, जिससे गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
कार्यशाला में उपस्थित शहरी स्वास्थ्य समन्वयक मिलिंद गौतम एवं कमरूल अमीन अंसारी ने पीएसआई इंडिया द्वारा आयोजित इस अभिमुखीकरण कार्यशाला की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी आयोजनों में पूरा सहयोग दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि समुदाय स्तर पर लोगों को प्रेरित करने की आवश्यकता है कि वे अपने घरों में ओआरएस एवं जिंक अवश्य रखें, ताकि डायरिया की स्थिति में तत्काल उपचार शुरू किया जा सके और बीमारी पर शीघ्र नियंत्रण पाया जा सके।कार्यशाला में अपर निदेशक कार्यालय से प्रियांश श्रेष्ठ, जय प्रकाश, पीएसआई इंडिया से राम कुमार तिवारी, अन्नू अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी एवं स्वास्थ्यक मौजूद रहे।
कानपुर में “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय कार्यशाला