विजयनगर में 38वीं भव्य संत रविदास जयंती शोभायात्रा हर्षोल्लास के साथ आयोजित

कानपुर।
संत रविदास जयंती समारोह समिति, विजयनगर के तत्वावधान में रविवार को 38वीं भव्य शोभायात्रा हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ आयोजित की गई। महात्मा गांधी इंटर कॉलेज से शुरू हुई यह यात्रा शहरवासियों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती रही। शोभायात्रा में उमड़े जनसैलाब और सात दिव्य झांकियों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और समतावादी रंगों से रंग दिया।
दोपहर 1 बजे प्रारंभ हुई शोभायात्रा में भगवान बुद्ध, गुरु रविदास-मीराबाई, ज्योतिबा फुले-सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, सम्राट अशोक और वीरांगना झलकारी बाई की जीवंत झांकियां प्रमुख आकर्षण रही। ये झांकियां विजयनगर और शास्त्री नगर के प्रमुख मार्गों से होकर ईदगाह मेले और अंततः फूलबाग स्थित मुख्य मेले में सम्मिलित हुईं।
मार्ग में जगह-जगह समाजसेवी जितेंद्र गौतम, जगदीश यादव, देवीदीन भाऊ और डॉ. एम.पी. दोहरे सहित कई अन्य लोगों ने स्टाल लगाकर मिष्ठान और खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने झांकियों का आनंद लिया और बच्चों व युवाओं ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया।
शोभायात्रा से पूर्व आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि हरविंदर सिंह लॉर्ड ने कहा कि “संतों से भरे ब्रह्मांड में गुरु रविदास ध्रुव तारा की तरह चमकते हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया।” गोष्ठी में मुख्य वक्ता गौतम कुमार अंबेडकर ने गुरु रविदास को बौद्ध विरासत का महान संत बताया। कार्यक्रम संयोजक राधेश्याम भारतीय ने संत रविदास के लोकतंत्र और समाजवाद के दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि सामंतवाद के साए में चुनौती देना केवल कबीर और रविदास जैसे क्रांतिकारी ही कर सकते थे। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव के खिलाफ बिगुल बजाकर मानवता को जोड़ने का कार्य किया।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होंने शोभायात्रा की व्यवस्था, सुरक्षा और आयोजन की प्रशंसा की। विचार गोष्ठी के बाद शोभायात्रा का मार्गदर्शन सुनिश्चित करते हुए फूलबाग मैदान में सभी झांकियों को क्रमबद्ध कर उनके योगदान और कला को पुरस्कृत किया गया।
अंत में बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और सम्राट बैंड की मधुर धुनों के साथ पूरे आयोजन का भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण समापन हुआ। इस शोभायात्रा ने न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश दिया, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश भी उपस्थित जनमानस तक पहुंचाया।
इस आयोजन ने विजयनगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में संत रविदास के विचारों के प्रति जागरूकता और सम्मान बढ़ाने का कार्य किया। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए, जिन्होंने मिलकर शोभायात्रा को और भी जीवंत और उत्साही बनाया।

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