31 जनवरी को सभी 3770 बूथों पर होगा बूथ डे, बीएलओ रहेंगे मौजूद
कानपुर।
जनपद में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत नो मैपिंग श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद की सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और वर्तमान में यह प्रक्रिया सुनवाई के चरण में है, जिसमें चिन्हित मामलों का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि एसआईआर के दौरान जनपद में लगभग 2 लाख 7 हजार मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। इनमें से 1,70,325 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब तक 175 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और 10 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा करीब 35 हजार मामलों की सुनवाई की जा चुकी है।
सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाता भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 वैध अभिलेखों में से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं तथा अपने बयान दर्ज करा रहे हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जो मतदाता पहली सुनवाई में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, उन्हें एक अतिरिक्त अवसर दिया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ है, तो वह परिवार के किसी सदस्य को प्रतिनिधि के रूप में भेज सकता है। प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता किसी भी कारण से मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में सभी मतदाता अपना नाम अवश्य जांच लें। यदि नाम सूची में है लेकिन उसमें कोई त्रुटि है, तो उसके सुधार के लिए फॉर्म-8 भरा जा सकता है। वहीं जिन पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं, ताकि 6 मार्च 2026 को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम शामिल हो सके।
उन्होंने बताया कि इसी क्रम में 31 जनवरी को जनपद के सभी 3770 बूथों पर पुनः ‘बूथ डे’ का आयोजन किया जाएगा। इस दिन सभी बूथों पर बीएलओ उपस्थित रहेंगे और नागरिकों को मतदाता सूची से संबंधित सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक जनपद में लगभग सवा लाख फॉर्म-6 तथा 40 हजार से अधिक फॉर्म-8 प्राप्त हो चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र, सामान्य निवासी और भारतीय नागरिक मतदाता सूची में सम्मिलित हो सकें। वर्तमान में लगभग 26 लाख मौजूदा मतदाताओं की सूची को सम्मिलित करते हुए 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान जनपद में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से निरंतर संवाद और सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके।
भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के अंतर्गत सुनवाई के लिए आवश्यक दस्तावेजों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार आवेदक https://voters.eci.gov.in/ पोर्टल पर विगत विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण निर्वाचक नामावली में अपना एवं संबंधित रिश्तेदारों का नाम देख सकते हैं। नोटिस मिलने पर आवेदकों को जन्म तिथि के आधार पर निर्धारित अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे।
निर्देशों के अनुसार—
1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे आवेदकों को केवल स्वयं से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे।
1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे आवेदकों को स्वयं के साथ पिता या माता में से किसी एक के अभिलेख देने होंगे।
2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे आवेदकों को स्वयं के साथ पिता और माता दोनों के अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे।
यदि माता या पिता में से कोई भारतीय नागरिक नहीं है, तो जन्म के समय के उनके वैध पासपोर्ट और वीजा की प्रति भी अनिवार्य होगी। विदेश में जन्म के मामलों में भारतीय मिशन द्वारा जारी जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र, तथा नागरिकता पंजीकरण के मामलों में संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
आयोग द्वारा स्वीकार्य 13 वैध अभिलेखों में केंद्र या राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश, 01 जुलाई 1987 से पहले भारत में जारी सरकारी या बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि के पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, ओबीसी/एससी/एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू), परिवार रजिस्टर, सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र शामिल हैं।
आधार से संबंधित मामलों में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पृथक निर्देश लागू होंगे। इसके अतिरिक्त बिहार एसआईआर की मतदाता सूची का अंश (01 जुलाई 2025 संदर्भ तिथि के अनुसार) भी मान्य होगा।
अंत में जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि वे समय रहते अपने अभिलेख तैयार रखें और नोटिस मिलने पर निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करें, जिससे मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाई जा सके।
नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई तेज, 35 हजार मामलों का निस्तारण