आईआईटी कानपुर में पीएचडी छात्र की आत्महत्या, कैंपस में शोक की लहर

कानपुर – देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। संस्थान के अर्थ विज्ञान विभाग से पीएचडी कर रहे एक मेधावी छात्र ईश्वर राम ने सोमवार को कैंपस की एक इमारत की दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। इस घटना के बाद पूरे संस्थान और छात्र समुदाय में गहरा शोक और सदमा फैल गया। ईश्वर राम मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले के निवासी थे। वे अपनी पत्नी और छोटी बच्ची के साथ आईआईटी कैंपस के भीतर आवंटित आवास में रह रहे थे। छात्र साथियों और परिचितों के अनुसार ईश्वर राम एक अत्यंत मेहनती और अनुशासित व्यक्ति थे, जो अकादमिक रूप से अत्यंत समर्पित थे। उनके कई शोध प्रबंध और प्रोजेक्ट कैंपस में चर्चित रहे हैं।
घटना के दिन, सोमवार को ईश्वर राम अचानक कैंपस स्थित एक इमारत की दूसरी मंजिल से नीचे छलांग लगाते हुए पाए गए। आनन-फानन में उन्हें संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही संस्थान में छात्रों और फैकल्टी में शोक की लहर दौड़ गई और कई छात्रों ने भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की।
पुलिस को सूचना मिलने पर मौके पर भारी पुलिस बल पहुंचा। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एसएम कासिम आबिदी ने मीडिया को बताया कि शुरुआती जांच और पूछताछ में यह पता चला है कि ईश्वर राम काफी समय से डिप्रेशन का सामना कर रहे थे। उनके मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए संस्थान द्वारा कई बार काउंसलिंग का प्रयास किया गया था, लेकिन मानसिक तनाव ने उन पर भारी प्रभाव डाल दिया।
डीसीपी पश्चिम ने यह भी बताया कि मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। राजस्थान में उनके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस की टीम वर्तमान में मृतक की पत्नी, परिवार और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के पीछे के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या हाल ही में कोई घटना या परिस्थिति उनके तनाव को और बढ़ाने का कारण बनी।
आईआईटी कानपुर प्रशासन ने इस दुखद घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और छात्र समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता दिखाई है। संस्थान के अधिकारी ने कहा कि छात्रों के लिए नियमित काउंसलिंग, मेंटल हेल्थ सेमिनार और आवश्यक समर्थन जारी रखा जाएगा। प्रशासन ने यह भी अपील की कि छात्र किसी भी मानसिक परेशानी के मामले में तुरंत सहायता लें।
इस घटना ने कैंपस में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस फिर से तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक दबाव, व्यक्तिगत जीवन की समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान न देना गंभीर परिणाम ला सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि संस्थानों को छात्रों के लिए नियमित काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम और सुरक्षित संवाद की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
छात्र साथियों ने कहा कि ईश्वर राम एक शांत और मिलनसार व्यक्ति थे, और किसी ने यह अनुमान भी नहीं लगाया था कि वे इतने गंभीर मानसिक तनाव में होंगे। उनके निधन से कैंपस में एक खालीपन और शोक का माहौल है। कई छात्र प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक तनाव के खतरे पर एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर समर्थन और देखभाल की कमी से छात्र गहन मानसिक दबाव में आ सकते हैं, और संस्थानों को इस पर तत्काल ध्यान देना होगा।

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