कानपुर।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (एआईयू) के अध्यक्ष एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में जापान के प्रतिष्ठित टोक्यो विश्वविद्यालय (यूटीओक्यो) का दौरा किया। इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और जापान के बीच उच्च शिक्षा, शोध, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित बैठक के दौरान कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने भारत–जापान के दीर्घकालिक और विश्वासपूर्ण शैक्षणिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत साझेदारी, संयुक्त शोध परियोजनाएं और छात्र–शिक्षक आदान–प्रदान से वैश्विक ज्ञान सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है और जापान इस दिशा में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है।
प्रो. पाठक ने भारतीय विश्वविद्यालयों की ओर से सहयोग के ठोस प्रस्ताव भी टोक्यो विश्वविद्यालय के समक्ष रखे, जिनमें संयुक्त डिग्री एवं ड्यूल डिग्री कार्यक्रम, साझा शोध प्रयोगशालाएं, फैकल्टी एक्सचेंज, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोध सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। टोक्यो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इन प्रस्तावों का स्वागत करते हुए भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को और गहराई देने की इच्छा व्यक्त की।
इस अवसर पर यूटीओक्यो के अधिकारियों ने “स्टडी इन जापान फ्रॉम साउथ एशिया” परियोजना की विस्तृत जानकारी भी साझा की। यह परियोजना जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईएक्सटी) द्वारा प्रायोजित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका संचालन टोक्यो विश्वविद्यालय के इंडिया ऑफिस द्वारा किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह इंडिया ऑफिस वर्ष 2012 में बेंगलुरु में स्थापित किया गया था और वर्ष 2015 से नई दिल्ली में कार्यरत है, जो आज दक्षिण एशिया में जापान–भारत शैक्षणिक संपर्क का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
परियोजना का प्रमुख लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में जापान में अध्ययन करने वाले दक्षिण एशियाई छात्रों की संख्या को दोगुना करना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जापान में भारतीय छात्रों की संख्या वर्ष 2024 में 1,685 से बढ़कर 2028 तक लगभग 3,000 होने का अनुमान है। वहीं, कुल दक्षिण एशियाई छात्रों की संख्या वर्ष 2022 में 20,344 से बढ़कर 2028 तक लगभग 40,688 तक पहुंच सकती है। इसे भारत और जापान के बीच बढ़ते शैक्षणिक आकर्षण और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल को जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (जेएसटी) के तहत संचालित ‘सकुरा साइंस प्रोग्राम’ तथा भारत–जापान संयुक्त ‘लोटस प्रोग्राम’ की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक शोध और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उन्नत सामग्री विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे उभरते एवं भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत–जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को शैक्षणिक और शोध के स्तर पर नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि एआईयू अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में यह सहयोग आने वाले वर्षों में न केवल छात्र और शोध समुदाय के लिए नए अवसर खोलेगा, बल्कि भारत और जापान के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान भी
एआईयू अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व में टोक्यो विश्वविद्यालय दौरा