सचेंडी दुष्कर्म कांड: फरार दरोगा अमित मौर्या का लेटर बम, खुद को बताया निर्दोष, सीबीआई जांच की मांग से बढ़ा सस्पेंस

कानपुर।
कानपुर कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले बहुचर्चित सचेंडी दुष्कर्म कांड में नामजद और फरार चल रहे आरोपी दरोगा अमित मौर्या ने अब एक नया दांव खेलते हुए सार्वजनिक रूप से एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उसने स्वयं को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले को साजिश करार दिया है और इसकी सीबीआई जांच की मांग की है। आरोपी का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब वह कई दिनों से पुलिस की पकड़ से बाहर है और उस पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
पत्र जारी कर दरोगा अमित मौर्या ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह कानून से भाग नहीं रहा, बल्कि निष्पक्ष जांच चाहता है। हालांकि, कानूनी जानकारों और पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में नामजद होने के बाद फरार रहते हुए जांच एजेंसी बदलने की मांग करना, केवल गिरफ्तारी से बचने और जनमत को प्रभावित करने की रणनीति हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी द्वारा जारी किए गए पत्र में उसने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है और स्थानीय पुलिस पर निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगाया है। उसने यह भी कहा है कि यदि सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि आरोपी खुद को निर्दोष मानता है, तो वह अब तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण क्यों नहीं कर रहा?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कानपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर आरोपी को पकड़ने के लिए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं, इसके बावजूद आरोपी दरोगा का लगातार फरार रहना पुलिस की कार्यशैली और खुफिया तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। आम जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर विभाग का ही एक अधिकारी किसके संरक्षण में इतने लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीआई जांच की मांग कोई अधिकार नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है, जिसे अदालत या सरकार तय करती है। आरोपी का इस तरह खुले पत्र जारी करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास भी माना जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले आरोपी को कानून के समक्ष प्रस्तुत होकर जांच में शामिल होना चाहिए, उसके बाद ही किसी निष्पक्षता की बात की जा सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता और उसके परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि कानून की रक्षा करने वाले ही कानून से भागने लगें, तो आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है। सोशल मीडिया और जनचर्चा में भी यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ रहा है कि पुलिस विभाग अपने ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा।
वहीं, कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से यह दावा किया गया है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और आरोपी चाहे पुलिस विभाग का ही सदस्य क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल, सचेंडी दुष्कर्म कांड में फरार दरोगा अमित मौर्या का यह पत्र मामले को और संवेदनशील और विवादास्पद बना चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस आरोपी को कब तक गिरफ्तार कर पाती है और क्या यह मामला वास्तव में किसी बड़ी जांच एजेंसी तक पहुंचता है या नहीं। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कानून की असली परीक्षा इस केस में कैसे और कब होती है।

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