सार्वजनिक स्थल पर सट्टे से जुड़ी संदिग्ध हलचल, प्रशासनिक निगरानी कटघरे में

मौज्जम अली
कानपुर नगर। थाना रेल बाजार क्षेत्र अंतर्गत रेल बाजार चौकी से कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित रामलीला मैदान में सट्टे की पर्चियों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के दृश्य सामने आने के बाद पुलिस व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। कैमरे में कैद हुए दृश्य इस ओर संकेत करते हैं कि यह गतिविधि किसी एक दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही हो सकती है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस कथित सट्टा नेटवर्क से जुड़ा एक व्यक्ति पहले कुनाल नामक व्यक्ति के यहां कार्यरत था। बाद में अलग होकर उसने अपना नेटवर्क खड़ा किया और उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक हुए बदलाव को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं होती रही हैं। उसके रहन-सहन और संपत्तियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे कथित अवैध कारोबार के संचालन में चंपू नामक व्यक्ति की भूमिका अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि वह बीते कई वर्षों से इस गतिविधि से जुड़ा रहा है और नेटवर्क के संचालन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर उसे इस कथित सट्टा संचालन का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक, दिन के समय सामान्य गतिविधियों की आड़ में और शाम ढलते ही सार्वजनिक स्थल पर पर्चियों के माध्यम से लेन-देन किया जाता था। रामलीला मैदान जैसे सार्वजनिक स्थल का इस प्रकार उपयोग होना कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है और पुलिस निगरानी की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पूर्व में भी मौखिक शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। चौकी के इतने नजदीक इस तरह की गतिविधियों का जारी रहना पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल खड़े करता है।सूत्रों के अनुसार, चंपू नामक व्यक्ति को पूर्व में एक बार रेल बाजार पुलिस द्वारा सट्टे की पर्चियों से जुड़ी कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया था, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।सूत्रों का यह भी दावा है कि चंपू से जुड़े कुछ लोग पर्चियों के माध्यम से सट्टे की रकम एकत्र करने का काम करते थे, जिससे यह नेटवर्क संगठित रूप से संचालित होने की आशंका और मजबूत होती है।अब जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आ चुका है, तो निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे प्रकरण को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ जांच व कार्रवाई कब तक की जाती है।

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