7500 जीवीडब्ल्यू से कम भार वाले वाहनों पर पुराने जुर्माने की दर लागू करने की मांग, ₹20,500 के भारी जुर्माने से आजीविका प्रभावित होने का हवाला
मनीष गुप्ता
कानपुर-पिकअप डाला और हल्के भार वाहन चालकों के संगठन ने मोटर वाहन अधिनियम में 30 जुलाई 2020 के बाद हुए बदलावों से उपजी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री की चौखट पर दस्तक दी है संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें परिवहन विभाग से तत्काल राहत देने की अपील की गई है चालकों ने अपनी मुख्य मांग दोहराते हुए कहा कि 7500 किलोग्राम सकल वाहन भार के भीतर दूध, फल, सब्जी, दवा और राशन जैसी जनउपयोगी वस्तुएं ढोने वाले वाहनों से 1988 के मोटर वाहन अधिनियम के तहत ही जुर्माना वसूला जाए संगठन का कहना है कि 7500 जीवीडब्ल्यू के भीतर चलने वाली गाड़ियों पर ₹20,500 का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, जिससे छोटे वाहन चालकों की आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है उन्होंने इस भारी जुर्माने को वापस लेने की मांग की है संगठन की प्रमुख माँगे पदाधिकारियों ने ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख माँगें उठाई हैं पिकअप डाला वाहनों की पासिंग को 2950 जीवीडब्ल्यू से बढ़ाकर 4950 जीवीडब्ल्यू किया जाए, ओवरलोड के नाम पर होने वाले भारी चालानों और वाहन सीज करने की कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाई जाए, फिटनेस के निजीकरण के बाद बढ़े हुए शुल्क को कम किया जाए, लाइट मोटर व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन और कैमरे से हुए चालानों की समय पर सूचना न मिलने की समस्या का समाधान हो, उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग पर लगाए जा रहे अत्यधिक जुर्माने पर आपत्ति जताई गई ज्ञापन सौंपने के दौरान मो. शमीम, अंकुर गुप्ता, यशवंत यादव, हरबंश सिंह अनुज, मनीष पाल, अनुराग शर्मा, संदीप पांडे, समसूल लका, रवि सिंह सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी व बड़ी संख्या में वाहन चालक मौजूद रहे।
मोटर वाहन अधिनियम के बदलावों से त्रस्त पिकअप लोडर संगठन पहुंचा सीएम की चौखट पर