कानपुर नगर। श्यामनगर बाईपास स्थित एक आई हॉस्पिटल पर उन्नाव जिले के बन्धर गांव के ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल ने “फ्री इलाज” और “आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क ऑपरेशन” का लालच देकर उन्हें बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों के अनुसार, अस्पताल संचालक अभिषेक श्रीवास्तव ने गांव में भव्य प्रचार के साथ नेत्र परीक्षण शिविर लगाया और भरोसा दिलाया कि सभी मरीजों का इलाज बिना किसी शुल्क के होगा।
लेकिन जांच के अगले ही दिन मरीजों को अस्पताल बुलाकर प्रत्येक से ₹9,000 की वसूली की गई, जबकि आयुष्मान योजना के तहत इलाज पहले से ही निःशुल्क होना चाहिए था, ऐसा ग्रामीणों का कहना है।
ऑपरेशन के बाद मरीजों को निजी घर में रखा, दवाओं के नाम पर अतिरिक्त रकम
ग्रामीणों का दावा है कि ऑपरेशन के बाद मरीजों को अस्पताल में रखने की बजाय उन्नाव के कल्याणीदेवी रोड स्थित एक निजी मकान में रातभर ठहराया गया। वहां न तो कोई चिकित्सकीय सुविधा थी और न ही सुरक्षा का इंतजाम।
इसके बाद दवाइयों और ड्रॉप के नाम पर भी अतिरिक्त रकम ली गई।
आरोप है कि पूरे समूह से मिलाकर लगभग ₹90,000 वसूल लिए गए—और इसके बावजूद आयुष्मान कार्ड से भुगतान निकालने की कोशिश की गई।
पाँच मरीजों की रोशनी कमजोर, शिकायत पर मिली चेतावनी!
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऑपरेशन के बाद पाँच मरीजों की आंखों की रोशनी पहले से अधिक कमजोर हो गई, लेकिन जब वे शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें केवल एक ड्रॉप की शीशी थमा दी गई और दोबारा न आने की चेतावनी दे दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल का रवैया बेहद अभद्र और असंवेदनशील था।
“हम CMO से लेकर बड़े अफसरों तक पैसा देते हैं”—ग्रामीणों का दावा, अस्पताल कर्मियों की धमकी
प्रकरण तब और सनसनीखेज हो गया, जब पीड़ित शुक्लागंज में अस्पताल की शाखा पर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि वहाँ मौजूद एक जिम्मेदार व्यक्ति ने उनसे अभद्रता करते हुए कहा—
“हम हर महीने CMO को भी पैसा देते हैं, और कई बड़े अफसरों तक महीना जाता है। चाहे जितनी शिकायत कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”
ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें साफ-साफ धमकी दी गई कि अस्पताल की “ऊँची पहुँच और सेटिंग” के कारण कोई विभागीय कार्रवाई नहीं होगी।
जिलाधिकारी से न्यायिक जांच की मांग, अस्पताल को सील करने की अपील
पीड़ित ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि—
अस्पताल की एनओसी और लाइसेंस की पूरी जांच की जाए
संस्थान को तत्काल सील किया जाए
वसूले गए ₹90,000 वापस कराए जाएँ
प्रभावित मरीजों का पुनः सही इलाज सुनिश्चित कराया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे इस मामले को आयुष्मान मिशन और स्वास्थ्य मंत्रालय तक ले जाने की तैयारी में हैं।
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आयुष्मान विभाग में प्राइवेट कर्मचारियों पर भी गंभीर सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग के नियमित अधिकारी और कर्मचारी नियमों के अनुसार काम करना चाहते हैं, लेकिन विभाग में तैनात कुछ प्राइवेट कर्मचारियों की पकड़ इतनी मजबूत है कि पूरा तंत्र उनकी मर्जी से चलता है।
उनका दावा है कि—
ये प्राइवेट कर्मचारी आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों से मोटी रकम लेकर विभिन्न “सुविधाएँ” दिलाने का वादा करते हैं।
यदि संबंधित अधिकारी अस्पताल का पैनल रिजेक्ट कर देते हैं, तो यही प्राइवेट कर्मचारी बदनाम करने और दबाव बनाने का खेल शुरू कर देते हैं।
एक ही प्राइवेट कर्मचारी पर आरोप है कि वह पूरे सिस्टम को अपने नियंत्रण में चलाता है और इसी वजह से विभाग की छवि बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि जब तक ऐसे लोगों की भूमिका उजागर नहीं होगी, तब तक आयुष्मान योजना के नाम पर होने वाली गड़बड़ियाँ रुकने वाली नहीं।