कानपुर। संरचना साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में वरिष्ठ कवि अशोक कुमार बाजपेई की संवेदनाओं से ओत–प्रोत दिव्यांग–केंद्रित काव्य कृति ‘आओ जी भर जिए’ का भव्य विमोचन समारोह उत्कर्ष एकेडमी, स्वरूप नगर में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, समाजसेवी एवं साहित्य–प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
“साहित्य समाज का दर्पण”—विधायक नीलिमा कटियार
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विधायक नीलिमा कटियार ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि
“साहित्य समाज का दर्पण है। ‘आओ जी भर जिए’ जैसी कृति समाज में अपनी अलग पहचान बनाएगी और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा–स्रोत सिद्ध होगी। यह पुस्तक पढ़ने से दिव्यांगों में साहस और आत्मविश्वास का संचार होगा।”
“कृति जीवन की दिशा दिखाती है”—पूर्व कुलपति डॉ. एल.के. पांडे
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व कुलपति डॉ. लक्ष्मीकांत पांडे ने कहा कि इस संग्रह की रचनाएँ दिव्यांगों को जीवन में आगे बढ़ने की सशक्त दिशा प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि “अशोक बाजपेई की यह कृति संवेदनशील चेतना का उत्कृष्ट परिणाम है।”
विशिष्ट अतिथियों ने की कृति की सराहना
विशिष्ट अतिथि श्याम सुंदर निगम ने कहा कि पुस्तक में दिव्यांगों के प्रति निरंतर संवेदनशीलता और सजगता दिखाई देती है।
वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश अवस्थी ने कहा कि काव्य–संग्रह की रचनाएँ दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ती हैं और उनकी पीड़ा के साथ–साथ हौसला भी बढ़ाती हैं।
उत्कर्ष एकेडमी के निदेशक डॉ. प्रदीप दीक्षित ने कहा कि ऐसे सार्थक लेखन के माध्यम से कवि ने समाज–हित का पुण्य कार्य किया है।
एक अन्य विशिष्ट अतिथि ने कहा कि पुस्तक “मानव संवेदनाओं को झकझोरकर जगाने वाली है।”
“दिव्यांग किसी से कम नहीं”—समाजसेवी सुनील मंगल
समाजसेवी सुनील मंगल ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज में बराबरी का अधिकार मिलने के साथ–साथ हर कदम पर मजबूती से आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “दिव्यांग किसी से कम नहीं हैं, बस उन्हें अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।”
कृतिकार ने साझा की कृति की भावना
कृति के लेखक अशोक कुमार बाजपेई ने बताया कि पुस्तक में 73 कविताएँ शामिल हैं, जो दिव्यांगजनों की चुनौतियों, संघर्षों और उनकी असीम संभावनाओं को उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह कृति सामान्य दिव्यांग व्यक्ति को समाज के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है।
सार्थक वक्तव्य और सुसंचालित कार्यक्रम
कार्यक्रम में गौरैया बचाओ अभियान के संयोजक एवं पर्यावरणविद गौरव बाजपेई ने सारगर्भित वक्तव्य दिया।
संचालन चक्रधर शुक्ला ने किया, वाणी वंदना गीतकार सुरेश गुप्ता राजहंस ने प्रस्तुत की।
स्वागत डॉ. अलका दीक्षित ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुनीता तिवारी ने किया।
अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं गणमान्यजन—
सतीश गुप्ता, गोपाल खन्ना, बलविंदर सिंह, रमेश दीक्षित, डॉ. विनोद, डॉ. प्रेम स्वरूप त्रिपाठी, सुरेंद्र गुप्ता ‘सीकर’, सुरेश राजहंस, राधा शाक्य, डॉ. सुधांशु त्रिपाठी, जयराम सिंह, राजकुमार सचान, रवि मिश्रा, शैलेंद्र त्रिपाठी, अरविंद शुक्ला, आदित्य बाजपेई, शैलेंद्र दुबे, राहुल गुप्ता, रोहित गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्य–प्रेमी मौजूद रहे।