पार्ट 1
कानपुर स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक प्राइवेट कर्मचारी का पूरा मामला इन दिनों चर्चाओं में है। 2019 में सीएमओ कार्यालय में मात्र 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त यह कर्मचारी आज एक लाख रुपये से अधिक की मासिक कमाई और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा है। आरोप है कि नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, क्लिनिक और अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन तथा निरीक्षण के नाम पर अब तक 3 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है। कल्याणपुर क्षेत्र के कई अस्पतालों से डेढ़ लाख तक और नौबस्ता-बर्रा क्षेत्र से एक-एक लाख तक की रकम तय कर वसूली का सिलसिला लंबे समय से जारी रहा। बताया जाता है कि काली कमाई से रामादेवी के पास पैथोलॉजी, पत्नी के नाम दवा का होलसेल व्यवसाय, गुजैनी हाइवे पर एक रेस्टोरेंट में पार्टनरशिप और चकेरी एयरपोर्ट के पास 50 से 70 लाख रुपये की जमीन खरीदी गई, जहाँ 50 बेड का अस्पताल बनाने की तैयारी की चर्चा है। विभाग में नए क्लर्कों को जहाँ सरकारी आवास तक नहीं मिलता, वहीं इस कर्मचारी ने काशीराम स्थित सरकारी बंगला कब्जे में ले रखा है। जिलाधिकारी द्वारा बंगला खाली कराने का आदेश भी जारी हुआ, लेकिन राजनीतिक रसूख और दबंगई के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। आरोप है कि यह कर्मचारी विभागीय अधिकारियों की कॉल रिकॉर्डिंग और गोपनीय बातचीत एकत्र कर उन्हें ब्लैकमेल करने का भी काम करता है। कई अस्पताल संचालकों का कहना है कि वह दबाव बनाकर कहता था कि मरीजों के सैंपल उसकी पसंद की लैब में भेजो और दवाएं उसकी होलसेल सप्लाई से लो, अन्यथा टीम भेजकर अस्पताल सील करा देगा।
सूत्रों का दावा है कि सीएमओ कार्यालय को लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि भारी वसूली का हिस्सा ऊपर तक पहुंचने की बात चर्चा में रही। विभाग के कुछ अधिकारी उसे हूटर लगी गाड़ी में साथ लेकर निरीक्षण पर जाते रहे, जिससे क्षेत्रीय संस्थानों में उसका दबदबा और मजबूत हुआ और वसूली का आंकड़ा 2–3 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। शिकायतें बढ़ने के बाद अब वह अकेले अस्पतालों में जाकर वसूली करने लगा है। कई संचालकों का यह भी कहना है कि यदि वे डीएम के पास शिकायत लेकर जाते हैं, तो वह उनका व्यवसाय बंद करवाने की धमकी देता है। अब कई अस्पताल संचालक और कर्मचारी पूरे मामले का विस्तृत ब्योरा जिलाधिकारी के संज्ञान में देने की तैयारी में हैं। देखना होगा कि क्या इस पूरे प्रकरण में कोई वास्तविक कार्रवाई होती है या फिर मामला एक बार फिर विभागीय लीपापोती में दबकर रह जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के ‘सिस्टम’ पर गंभीर सवाल, करोड़ों की वसूली का खेल उजागर