कानपुर।
बिधनू सीएचसी में कथित ₹25 हजार वसूली प्रकरण पर नया मोड़ आ गया है। मामले में कार्रवाई तो दूर, विभाग की लगातार चुप्पी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया है। तीन दिन में जवाब देने का नोटिस जारी हुआ था, लेकिन आठ दिन बाद भी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। वहीं, नोटिस में असली आरोपी की जगह किसी अन्य झोलाछाप का नाम डाल दिए जाने की बात ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। सूत्रों के अनुसार, नाम बदलने की इस गड़बड़ी से वरिष्ठ अधिकारियों तक को गलत जानकारी पहुंचाई गई परिणामस्वरूप, पत्रकारों के सवालों पर भी अस्पष्ट और आधी-अधूरी जानकारी देकर मामले को टालने की कोशिश होती रही। स्थानीय पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उनसे जानबूझकर तथ्य छिपाए गए और खबर न चलाने का दबाव बनाया जा रहा है। इस बीच, बिधनू क्षेत्र के एक अधिकारी द्वारा थाने में एकतरफा एप्लीकेशन देकर “दबाव बनाने” की कोशिश किए जाने की चर्चा भी तेज है। मीडिया जगत में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना अब अपराध माना जाएगा।जनता का कहना है कि यदि वसूली का मामला निराधार है तो विभाग सामने आकर इसका स्पष्ट खंडन करे। और यदि वसूली हुई है, तो असली आरोपी के नाम से परहेज क्यों।स्थानीय लोगों और पत्रकारों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और जिम्मेदारों पर उचित कार्रवाई हो। बिधनू में फिलहाल वसूली से ज्यादा “सच छुपाने की कोशिश” सुर्खियों में है—और यही वजह है कि लोग अब प्रशासन से सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं: आखिर सच्चाई बताने में दिक्कत क्या है।
बिधनू सीएचसी वसूली विवाद नोटिस की गड़बड़ी ने बढ़ाए सवाल, विभाग की चुप्पी बनी रहस्य