यूके व्यापार विस्तार पर फोकस: सीएलई क्षेत्रीय अध्यक्ष असद ईराक़ी की अध्यक्षता में चर्म निर्यात परिषद ने उन्नाव में संगोष्ठी आयोजित की
कानपुर।
भारत सरकार की संस्था चर्म निर्यात परिषद (Council for Leather Exports – CLE) द्वारा तपारिया कंसल्टेंट्स लिमिटेड, यूनाइटेड किंगडम के सहयोग से उन्नाव स्थित केएलसी कॉम्प्लेक्स में “यूके निर्यात और व्यापार अवसर” विषय पर एक विशेष कार्यशाला-संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीएलई के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद कमाल ईराक़ी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने तपारिया कंसल्टेंट्स लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक सुधीर तपारिया का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
अपने उद्बोधन में असद ईराक़ी ने कहा कि “विश्व व्यापार में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर भारतीय चमड़ा उद्योग पर अवश्य पड़ा है, परंतु इस स्थिति को अवसर में बदलने के लिए हमें यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय देशों में अपने व्यापार का विस्तार करना होगा। भारत की लेदर इंडस्ट्री गुणवत्ता, डिज़ाइन और सस्टेनेबिलिटी के कारण वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बना रही है।”
उन्होंने कहा कि सीएलई द्वारा इस तरह की संगोष्ठियों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी देना है, ताकि वे सीमा पार सलाहकार समाधान (Cross Border Advisory Solutions) का लाभ उठाकर विदेशी बाजारों में अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें। ईराक़ी ने कहा, “भारत अब सिर्फ उत्पादक देश नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापारिक साझेदार बनने की दिशा में अग्रसर है।”
इसके पश्चात सुधीर तपारिया ने अपनी टीम के साथ एक विस्तृत पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के तकनीकी और नियामक पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार भारतीय निर्यातक वित्तीय प्रबंधन, कर नियमन, व्यापारिक दस्तावेज़ीकरण और रणनीतिक योजना के माध्यम से यूके तथा यूरोपीय बाजारों में अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी दरों पर सफलतापूर्वक स्थापित कर सकते हैं।
सुधीर तपारिया ने कहा, “भारत सरकार ने यूनाइटेड किंगडम के साथ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) किया है, जिससे अब भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के साथ व्यापार करना और भी आसान और लाभकारी होगा।”
कार्यक्रम में मौजूद निर्यातकों ने कई व्यवहारिक प्रश्न भी पूछे — विशेषकर विदेशी खरीदारों द्वारा भुगतान न करने या शिपमेंट रोकने जैसी स्थितियों में क्या कदम उठाए जाएं। इस पर कंसल्टेंट्स ने सलाह दी कि “हर निर्यातक को किसी भी डील से पहले आयातक की कंपनी प्रोफाइल, वैध कानूनी दस्तावेज, भुगतान की शर्तें और बैंक गारंटी की गहन जांच करनी चाहिए।”
इस मुद्दे पर क्षेत्रीय अध्यक्ष असद ईराक़ी ने आश्वासन दिया कि सीएलई ऐसे मामलों में निर्यातकों को कानूनी व संस्थागत सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि परिषद जल्द ही एक विशेष हेल्पडेस्क शुरू करेगी जो निर्यातकों को सलाह और सहायता प्रदान करेगी।
संगोष्ठी के अंत में करन इंटरनेशनल के करन अरोरा ने सभी अतिथियों — क्षेत्रीय अध्यक्ष असद कमाल ईराक़ी, कंसल्टेंट्स सुधीर तपारिया, सीएलई निदेशक मंडल, और सभी उपस्थित निर्यातकों — का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में लेदर व फुटवियर उद्योग से जुड़े उद्यमी, युवा निर्यातक, व्यापारिक सलाहकार, तथा सीएलई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन भविष्य के सहयोग और व्यापारिक विस्तार के नए संकल्पों के साथ हुआ।