कानपुर – बेनाझाबर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में आज गुरु नानक देव जी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सरदार नीतू सिंह, अध्यक्ष गुरु नामदेव गुरुद्वारा बारा देवी, द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। विद्यालय परिसर ‘सत नाम वाहे गुरु’ के जयघोषों से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि सरदार नीतू सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में गुरु नानक देव जी के उपदेशों को आज के समाज के लिए प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि “मनुष्य को नाम जपना अर्थात ईश्वर का स्मरण करते रहना चाहिए, जिससे मन की शुद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।” उन्होंने गुरु नानक देव जी के तीन प्रमुख सिद्धांत — नाम जपना, कीरत करना और वंड छकना — पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हमें ईमानदारी और परिश्रम से जीवन-यापन करना चाहिए तथा अपनी आय का एक हिस्सा जरूरतमंदों की सहायता में लगाना चाहिए।
सरदार सिंह ने समाज में फैले भेदभाव का विरोध करते हुए सभी को समान दृष्टि से देखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “नारी का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसी से सृष्टि की रचना होती है।” उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव ने सदैव अंधविश्वास, पाखंड और बाहरी दिखावे का विरोध किया और सच्चे कर्म व भक्ति को ही वास्तविक धर्म बताया।
कार्यक्रम में छात्रों ने गुरुनानक देव जी के जीवन से प्रेरित लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कक्षा अष्टम की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत भजन “सतनाम वाहे गुरु” ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। इसके अलावा अंबुज सिंह परिहार ने मातृभाषा में और आम्या शर्मा ने अंग्रेजी भाषा में अपने विचार रखे।
अतिथि परिचय कैप्टन दाक्षिण्य निकेतन के अमृतांशु मिश्र ने कराया तथा कार्यक्रम के अंत में छात्र परिषद के सह संयोजक यश त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बृजमोहन कुमार सिंह ने कहा कि “गुरु नानक देव जी का जीवन सत्य, सेवा और सदाचार का प्रतीक है, हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में भाईचारा और शांति स्थापित करनी चाहिए।” इस अवसर पर उपप्रधानाचार्या मंजू बाला श्रीवास्तव, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।