कानपुर मेट्रोः बारादेवी से नौबस्ता तक 5.3 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन में ट्रैक निर्माण कार्य पूरा

*कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प तक अंडरग्राउंड सेक्शन में भी बिछने लगा ट्रैक

कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-1 (आईआईटी – नौबस्ता) के शेष हिस्से में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्रम में बारादेवी से नौबस्ता तक लगभग 5.3 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन में ट्रैक निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया गया है। उक्त सेक्शन की दोनों लाइनों (‘अप-लाइन’ और ‘डाउनलाइन’) पर ट्रैक की ढलाई आज पूरी कर ली गई। इस सेक्शन पर ट्रैक निर्माण के दौरान ही चार क्रॉसओवर्स का निर्माण भी पूरा किया गया है।

बारादेवी से नौबस्ता तक एलिवेटेड सेक्शन के अंतर्गत बारादेवी, किदवई नगर, बसंत विहार, बौद्ध नगर और नौबस्ता – पांच स्टेशन आते हैं। मेट्रो ट्रैक निर्माण के दौरान वायाडक्ट (उपरिगामी पुल) पर 18 मीटर लंबे कुल 1150 रेल (पटरियों) और उन्हें वेल्ड करने के लिए एफबीडब्लू (फ्लैश बट्ट वेल्ड) प्लांट को क्रेन के माध्यम से पहुंचाया गया था। पटरियों की वेल्डिंग के साथ ही निश्चित अंतराल पर ट्रैक स्लैब की ढलाई का कार्य भी समानांतर रूप से बढ़ाया गया, जिसे अब पूरा कर लिया गया है।

5.3 किमी लंबे इस सेक्शन में ट्रैक निर्माण के दौरान ही बारादेवी और नौबस्ता स्टेशनों पर दो-दो नए क्रॉसओवर्स (कुल चार) भी तैयार किए गए। नौबस्ता में तैयार दो क्रॉसओवर्स में से एक ‘सीजर’ क्रॉसओवर है। ज्ञात हो कि सुगमतापूर्वक ट्रेन परिचालन के लिए क्रॉसओवर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्रॉसओवर के माध्यम से ही ट्रेनें दिशा या ट्रैक बदल पाती हैं।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा कि, “आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक सेवाओं के विस्तार के बाद अब उत्तर प्रदेश मेट्रो की टीम कॉरिडोर-1 को अंतिम स्टेशन नौबस्ता तक पहुंचाने के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। 5.3 किमी लंबे बारादेवी-नौबस्ता सेक्शन का ट्रैक निर्माण पूरा होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प तक लगभग 3 किमी लंबे अंडरग्राउंड हिस्से में भी रेल (पटरियां) बिछाने का कार्य आरंभ किया जा चुका है। समय की बचत के लिए बैलेंस सेक्शन पर ट्रैक निर्माण के साथ ही सिग्नलिंग, टेलिकॉम और इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स के इंस्टॉलेशन का कार्य भी समानांतर रूप से किया जा रहा है। मुझे खुशी है कि हमारी टीम और कार्यदायी संस्थाएं अपने लक्ष्य की दिशा में पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं।”

*मेट्रो ट्रैक की विशेषताएं*
कानपुर मेट्रो में ट्रेन परिचालन के लिए बैलास्ट-लेस (गिट्टी-रहित) ट्रैक का प्रयोग होता है। बैलास्ट-लेस ट्रैक में रखरखाव की कम से कम आवश्यकता पड़ती है और इनका जीवन-चक्र भी लंबा होता है। ट्रैक की रेल (पटरियां) हेड हार्डेंड तकनीक से बनीं हैं। ऐसी रेल (पटरियों) का प्रयोग हाई स्पीड फ्रेट कॉरिडोर में भी किया जाता है।

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