वन्यजीव सप्ताह में बच्चों ने सीखी प्रकृति से जुड़ाव की सीख, चित्रों और कहानियों से दिया संरक्षण का संदेश

कानपुर,वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर जिला गंगा समिति कानपुर नगर द्वारा इस वर्ष संरक्षण और जागरूकता का एक व्यापक अभियान चलाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन की महत्ता से जोड़ना था। इस सप्ताह के दौरान आयोजित विविध कार्यक्रमों ने भावी पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया। शैक्षणिक संस्थानों में विशेष आयोजन
जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला में,रॉयल ड्रीम वर्ल्ड इंटर कॉलेज बिठूर में बच्चों के लिए विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इन आयोजनों ने छात्रों को अपनी रचनात्मकता और विचारों को व्यक्त करने का मंच प्रदान किया चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने वन्यजीवों एवं प्रकृति पर आधारित बेहद सुंदर और सार्थक चित्र बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में शिक्षा,शिवानी,ऋचा,श्यामा, मान्या जैसे छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया।
स्टोरी टेलिंग प्रतियोगिता वन्यजीव संरक्षण के विषय पर आधारित प्रेरणादायक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं जिन्होंने उपस्थित लोगों को वन्यजीवों के महत्व और उनके जीवन के संघर्षों से परिचित कराया। अधिकारियों और विशेषज्ञों का आह्वान कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के पारिस्थितिक महत्व और उनके तत्काल संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की और सभी नागरिकों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। रॉयल ड्रीम वर्ल्ड इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या सपना सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। हमारा विद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिला परियोजना अधिकारी (नमामि गंगे),शशांक शुक्ला ने इस अवसर पर एक शक्तिशाली संदेश देते हुए कहा,वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी या सामाजिक संस्थाओं का कार्य नहीं,बल्कि यह हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए। यह आयोजन बच्चों में न केवल जागरूकता, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक सकारात्मक सोच और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मील का पत्थर साबित होते हैं। हमें याद रखना होगा कि प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है। यह आयोजन स्पष्ट करता है कि नमामि गंगे और जिला गंगा समिति,गंगा की निर्मलता के साथ-साथ उसके व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए शिक्षा और जन-जागरूकता को एक शक्तिशाली उपकरण मानती है।

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